रेलवे कामगार मजदूर यूनियन संरक्षक एवं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र पर लगाया बड़ा आरोप
छत्तीसगढ़ ।केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों को लेकर रेलवे कामगार मजदूर यूनियन के संरक्षक तथा प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अभय नारायण राय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों की आवाज उठाने वाले संगठनों का गला घोंटकर यह कानून लागू किया है और अब श्रमिक हितों की बात करना कपोल-कल्पित दावा मात्र है।
राय ने कहा कि केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडवीया द्वारा नए श्रम कानूनों को लेकर किए गए सभी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। उनके अनुसार, नए प्रावधानों का उद्देश्य श्रमिक संगठनों को कमजोर करना है, ताकि मजदूरों की समस्याओं को उठाने वाला कोई प्लेटफॉर्म ही न बचे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसे कानून पारित किए हैं, जो श्रमिक यूनियनों के गठन को कठिन बनाते हैं और मजदूरों की आवाज दबाने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि आज भी देश के अधिकांश उद्योगों में न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जा रही है। कार्यस्थलों पर मजदूरों से 8 घंटे के बजाय 12 से 16 घंटे तक काम करवाया जा रहा है, जो “बंधुआ मजदूरी” की तरह है। राय के अनुसार, औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति भी अत्यंत खराब है, जिसका प्रमाण लगातार बढ़ती दुर्घटनाएँ और मजदूरों की मौत के मामले हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मालिकों को पूरी छूट मिली हुई है, जबकि श्रमिक सुरक्षा से संबंधित ठोस कानूनों की अनुपस्थिति बनी हुई है।
अभय नारायण राय ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की श्रम नीति पूरी तरह मजदूर विरोधी है और इससे श्रमिक वर्ग को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि श्रमिक संगठनों को एकजुट होकर इन नीतियों का विरोध करना होगा और मजदूर हितों की रक्षा के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।
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