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October 29, 2026 7:35 pm

होटल में सरकारी दस्तावेज दिखाने के बदले रुपये लेने का वीडियो चर्चा में, एसएसपी ने किया खंडन

“एसएसपी रजनेश सिंह बोले-जिला पुलिस बिलासपुर का कोई कर्मचारी नजारत शाखा में कार्यरत नहीं, पुलिसकर्मी बताना तथ्यात्मक रूप से गलत”

CBN36 बिलासपुर। तोरवा स्थित एक होटल में सरकारी दस्तावेज दिखाने के दौरान कथित तौर पर रुपये के लेनदेन का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। वीडियो में दो व्यक्ति एक बैग से दस्तावेज निकालकर सामने बैठे व्यक्ति को दिखाते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान नकदी के लेनदेन का दृश्य भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मामले को जिला न्यायालय की नजारत शाखा से जोड़कर संबंधित व्यक्तियों को पुलिसकर्मी बताया गया, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने इसका खंडन किया है।

एसएसपी रजनेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिला पुलिस बिलासपुर का कोई भी कर्मचारी न्यायालय की नजारत शाखा में कार्यरत नहीं है। ऐसे में नजारत शाखा में पदस्थ कर्मचारियों को जिला पुलिस का कर्मचारी या पुलिसकर्मी बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। पुलिस के इस स्पष्टीकरण के बाद मामले में संबंधित व्यक्तियों की वास्तविक पहचान और विभागीय संबद्धता महत्वपूर्ण हो गई है।

होटल में रुपये के लेनदेन और दस्तावेज दिखाने का दावा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला करीब एक सप्ताह पहले का बताया जा रहा है। तोरवा स्थित छत्तीसगढ़ होटल में शाम लगभग चार बजे दो व्यक्ति बैग लेकर पहुंचते हैं। कुछ देर बाद एक अन्य व्यक्ति वहां आता है। इसके बाद तीनों के बीच बातचीत शुरू होती है। बातचीत के दौरान चाय-नाश्ते का आर्डर भी दिया जाता है।

वीडियो के संबंध में किए जा रहे दावों के मुताबिक, सादे कपड़ों में मौजूद व्यक्ति अपने पर्स से पांच-पांच सौ रुपये के नोट निकालकर सामने बैठे व्यक्ति को देता है। इसके बाद कुछ और रुपये दिए जाने का दृश्य दिखाई देने की बात कही जा रही है। कुछ देर बाद बैग से दस्तावेज निकालकर सामने बैठे व्यक्ति को दिखाए जाते हैं। वह अपने मोबाइल फोन से दस्तावेजों की तस्वीरें लेता नजर आता है।

इस घटनाक्रम को लेकर सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच और कथित लेनदेन के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता, नकदी देने के कारण और दस्तावेजों की प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे रिश्वत या सरकारी दस्तावेज बेचने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

नजारत शाखा के कर्मचारी को पुलिसकर्मी बताने पर सवाल

एसएसपी रजनेश सिंह के खंडन के बाद यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जिला पुलिस बल और न्यायालय की नजारत शाखा में पदस्थ कर्मचारी एक ही विभाग के कर्मचारी नहीं हैं। नजारत शाखा में कार्यरत व्यक्तियों को पुलिसकर्मी बताने से पहले उनकी वास्तविक पदस्थापना और विभागीय संबद्धता की पुष्टि आवश्यक है।

वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान, उनके पास मौजूद दस्तावेजों की प्रकृति और नजारत शाखा से उनके संबंध की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

न्यायालयीन दस्तावेजों की सुरक्षा का सवाल

जिला न्यायालय की नजारत शाखा न्यायालयीन प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन करती है। यहां संबंधित न्यायालयीन आदेशों के क्रियान्वयन और अभिलेखों के प्रबंधन से जुड़े दायित्व निभाए जाते हैं। यदि किसी दस्तावेज को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर जाकर किसी व्यक्ति को दिखाया गया है या उसकी तस्वीर लेने दी गई है, तो यह जांच का विषय हो सकता है।

हालांकि, संबंधित दस्तावेज किस प्रकार के थे, उन्हें दिखाने की अनुमति थी या नहीं और नकदी का लेनदेन किस उद्देश्य से हुआ, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई

पूरे मामले में वीडियो की प्रामाणिकता, संबंधित व्यक्तियों की पहचान, दस्तावेजों की प्रकृति और नकदी के कथित लेनदेन के उद्देश्य की जांच महत्वपूर्ण है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित व्यक्तियों के पास दस्तावेज किस अधिकार से थे और क्या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया।

एसएसपी रजनेश सिंह के खंडन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला पुलिस बिलासपुर का कोई कर्मचारी नजारत शाखा में कार्यरत नहीं है। अब वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्तियों की वास्तविक पहचान और कथित लेनदेन की परिस्थितियों की पुष्टि से ही मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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