भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए भाषा का व्यवहार में प्रयोग, नए शब्दों का निर्माण और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करना जरूरी
CBN36 वर्धा, 12 अक्टूबर। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञान विभाग एवं हिंदी साहित्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय भाषाओं के लिए करणीय कार्य’ विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में भारतीय भाषा समिति, भारत सरकार के अध्यक्ष चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं के लिए एकसमान तकनीकी शब्दावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास, संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस प्रयास करने होंगे, ताकि इन भाषाओं का प्रयोग शिक्षा, शोध और तकनीकी क्षेत्रों में व्यापक रूप से हो सके।
विश्वविद्यालय के ग़ालिब सभागार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। व्याख्यान में चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय भाषाओं को महत्व दिए जाने के बाद इस विषय पर चर्चा और कार्य की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भाषाओं के बीच मूल रूप से विवाद नहीं, बल्कि आत्मीयता और एकता का भाव रहा है। भारतीय भाषाओं की विविधता के बावजूद उनके बीच सांस्कृतिक और वैचारिक जुड़ाव बना हुआ है।
शास्त्री ने भारतीय परंपरा में प्राचीन ग्रंथों के प्रसार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन ग्रंथों का केवल अनुवाद नहीं हुआ, बल्कि उनकी कथावस्तु को आधार बनाकर विभिन्न भाषाओं में अनुकृति भी की गई। इससे भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा मजबूत हुई।
उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास के लिए आवश्यक कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी भाषा के विकास के लिए उसके बोलने वालों की संख्या और भाषा के प्रति उनकी सक्रियता महत्वपूर्ण है। भाषा का उपयोग केवल संवाद तक सीमित न रहकर शिक्षा और अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में भी होना चाहिए। इसके साथ ही निरंतर नए शब्दों का निर्माण, तकनीकी का उपयोग, गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन सामग्री तैयार करना और भाषाओं को राजकीय संरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। इन प्रयासों से भारतीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित किया जा सकता है।
भारतीय भाषाओं के लिए स्वस्थ वातावरण बनाना सामूहिक जिम्मेदारी : प्रो. कुमुद शर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं के लिए स्वस्थ और अनुकूल वातावरण तैयार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच गहरी आत्मीयता और जुड़ाव है तथा उनकी सांस्कृतिक चेतना का मूल भाव एक है।
उन्होंने भारतीय भाषा समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में पठन-पाठन के साथ-साथ शोध की दिशा को भी विकसित करेगा। इससे भारतीय भाषाओं के अध्ययन, उनके अंतर्संबंधों की समझ और उनके विकास से जुड़े प्रयासों को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने स्वागत भाषण दिया। संचालन भाषाविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आम्रपाल शेंदरे ने किया, जबकि भाषाविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एच.ए. हुनगुंद ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
प्रधान संपादक