“कमलचंद्र भंजदेव बोले आदिवासी बहाली के मुद्दे पर मैं पनिका समाज के साथ हूं संबंधित प्राधिकारियों से चर्चा का दिया आश्वासन”
CBN36 जगदलपुर। पनिका समाज की अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में पुनर्बहाली की मांग को लेकर बस्तर के महाराज कमलचंद्र भंजदेव ने सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने पनिका समाज के साथ अपने राजपरिवार के सदियों पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए समाज की मांग और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को गंभीरता से सुना। साथ ही, बस्तर दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में आयोजित होने वाली सामाजिक बैठक में शामिल होने तथा सभी तथ्यों और परिस्थितियों को समझने के बाद संबंधित प्राधिकारियों से चर्चा करने का आश्वासन दिया।
पैलेस में प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात
10 अक्टूबर को जगदलपुर में बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा उत्सव के अंतर्गत काछनगुड़ी में काछन देवी से उत्सव आयोजन की अनुमति लेने की पारंपरिक रस्म के बाद महाराज कमलचंद्र भंजदेव ने अपने पैलेस में पनिका समाज के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने अनुसूचित जनजाति सूची में पुनर्बहाली की मांग और उससे संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों को उनके समक्ष रखा।
महाराज ने समाज की बात सुनते हुए इस विषय पर आगे संवाद करने की सहमति जताई। उल्लेखनीय है कि कमलचंद्र भंजदेव भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं तथा राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
608 वर्षों की परंपरा में पनिका समाज की ऐतिहासिक उपस्थिति
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, जनजातीय आस्थाओं और ऐतिहासिक सामाजिक संबंधों का प्रतीक है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में काछन देवी से अनुमति लेने की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, क्वारी पनिका बालिका में काछन देवी की सवारी आने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। वर्तमान बस्तर दशहरा को इस ऐतिहासिक परंपरा का 608वां वर्ष बताया जाता है।
पनिका समाज का कहना है कि उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उपलब्ध तथ्यों को उचित मंच पर प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। ऐसे में बस्तर महाराज की ओर से संवाद के लिए सहमति मिलने को समाज अपनी मांग आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रहा है।
दशहरा के बाद रायपुर में होगी सामाजिक बैठक
पनिका समाज के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. फूलदास महंत ने महाराज के समक्ष समाज की अनुसूचित जनजाति सूची में पुनर्बहाली की मांग रखी। इस पर कमलचंद्र भंजदेव ने समाज के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए बस्तर दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने बैठक में स्वयं शामिल होने का आश्वासन भी दिया।
प्रस्तावित बैठक में समाज से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, वर्तमान परिस्थितियों और मांग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष विषय रखने की दिशा में आगे की पहल की उम्मीद है।
हालांकि, अनुसूचित जनजाति सूची में किसी समुदाय को शामिल करने अथवा पुनर्बहाल करने का निर्णय निर्धारित संवैधानिक और विधिक प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारियों द्वारा ही लिया जाता है। ऐसे में महाराज का आश्वासन संवाद की दिशा में एक पहल है, जबकि पुनर्बहाली का अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख पदाधिकारी रहे शामिल
बस्तर महाराज से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. देवधर महंत, वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. फूलदास महंत, कोरबा सांसद के प्रतिनिधि पोषक महंत तथा डॉ. बरसाइतदास महंत शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने समाज की मांग और उससे जुड़े तथ्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया।
बस्तर महाराज की सकारात्मक पहल के बाद अब पनिका समाज की निगाहें दशहरा उत्सव के पश्चात प्रस्तावित रायपुर बैठक पर टिकी हैं। समाज को उम्मीद है कि इस बैठक के माध्यम से उसकी ऐतिहासिक मांग, उपलब्ध साक्ष्यों और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में संबंधित स्तर पर संवाद को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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