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August 22, 2026 8:56 pm

पदोन्नति से अटैचमेंट तक… शिक्षा विभाग में अनियमितताओं के आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग

संयुक्त संचालक से मिले अंकित गौरहा, पूर्व शिकायतों पर कार्रवाई की लिखित जानकारी भी मांगी

CBN36 बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं की शिकायतों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। फरवरी से मई 2026 के बीच की गई कई शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंकित गौरहा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने शिक्षा संभाग बिलासपुर के संयुक्त संचालक से व्यक्तिगत मुलाकात कर विस्तृत पत्र सौंपा और पूर्व में की गई शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई की लिखित जानकारी मांगी।

पांच शिकायतों के बाद भी जांच पर सवाल

गौरहा ने पत्र में कहा है कि जिला शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में समय-समय पर गंभीर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने मांग की है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि प्रथम दृष्टया अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति पर भी सवाल

शिकायतों के मुताबिक, 9 फरवरी 2026 को अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद 20 मार्च को फर्जी अनुकंपा नियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण, कोटा से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और पदोन्नति-प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए।

पदोन्नति-पदस्थापना आदेशों की जांच की मांग

4 मई 2026 को की गई शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी पदोन्नति और पदस्थापना आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई गई। शिकायत में लोक शिक्षण संचालनालय और उच्च न्यायालय के आदेशों के संदर्भ में जारी आदेशों तथा उनके पालन के बाद की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। कुछ पदोन्नति और पदस्थापना मामलों में कथित विसंगतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है।

जिस पर आरोप, उसी से जांच नहीं कराने की मांग

गौरहा ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी या स्वतंत्र जांच दल से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों की भूमिका को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, उन्हीं के स्तर पर जांच होने से उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

मूल नस्तियां और नोटशीट सुरक्षित रखने की मांग

पत्र में मूल नस्तियों, नोटशीट, आदेशों, वरिष्ठता सूची, पदोन्नति एवं पदस्थापना से संबंधित अभिलेखों और न्यायालयीन आदेशों के पालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। साथ ही जांच पूरी होने तक मूल अभिलेखों में किसी तरह का बदलाव, संशोधन या नस्ती से छेड़छाड़ न हो, इसके लिए उन्हें सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।

अब विभाग के जवाब पर टिकी निगाहें

लगातार शिकायतों के बाद भी स्वतंत्र जांच क्यों नहीं हुई, यह सवाल अब उठने लगा है। क्या शिकायतों पर केवल विभागीय स्तर पर पत्राचार हुआ या आरोपों की वास्तविक जांच भी की गई? यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट क्या है और यदि जांच लंबित है तो इसकी वजह क्या है?

संयुक्त संचालक से मुलाकात और विस्तृत शिकायत सौंपे जाने के बाद अब मामला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने है। ऐसे में देखना होगा कि विभाग शिकायतों को महज पत्राचार तक सीमित रखता है या संबंधित दस्तावेजों की जांच कर आरोपों की वास्तविकता सामने लाते हुए जिम्मेदारी भी तय करता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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