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August 16, 2026 5:09 pm

खाद्य सुरक्षा के नाम पर जांच का खेल? होटल-रेस्टोरेंटों में स्वच्छता और मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल

CBN36 छत्तीसगढ़ । खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। शहर और आसपास के इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट, ठेले, खोमचे और स्ट्रीट फूड सेंटरों पर खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई जगह शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की तैयारी, बर्तनों और सामग्री के भंडारण के लिए अलग व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन मौके पर तस्वीर इसके उलट दिखाई देती है।

एक ही किचन में वेज-नॉनवेज का खेल

ग्राहकों को शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के लिए अलग किचन, बर्तन और स्टोरेज की जानकारी दी जाती है, लेकिन वास्तविक व्यवस्था कितनी अलग है, इसकी जानकारी आम ग्राहक को नहीं होती। यही स्थिति ऑनलाइन फूड डिलीवरी के जरिए भोजन मंगाने वाले ग्राहकों के लिए और अधिक चिंता का विषय बन जाती है।

बार-बार इस्तेमाल हो रहा खाद्य तेल

कई छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों में खाद्य तेल का बार-बार इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। इसके अलावा साफ पानी, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और स्वच्छ वातावरण के बजाय गंदगी के बीच भोजन तैयार किए जाने के मामले भी चिंता बढ़ा रहे हैं।

बाथरूम के पास बर्तन, वहीं तैयार हो रहा खाना

कुछ स्थानों पर किचन की स्वच्छता व्यवस्था बेहद खराब होने की बात सामने आती है। बर्तन धोने की जगह, किचन और अन्य उपयोगी स्थानों के बीच पर्याप्त अंतर नहीं होने से खाद्य पदार्थों के दूषित होने का खतरा बना रहता है। सवाल यह है कि नियमित निरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कितनी गंभीरता से होती है?

सड़क किनारे ठेलो में वेज-नॉनवेज की बिक्री

सड़क किनारे अस्थायी टेंट और ठेलों पर भी खाद्य पदार्थों की बिक्री हो रही है। कई जगह मांसाहारी खाद्य पदार्थों के साथ शाकाहारी खाद्य पदार्थ भी तैयार किए जाते हैं। खाद्य सामग्री में रंग, मसाले और अन्य पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर भी खाद्य मानकों की जांच जरूरी है।

सैंपलिंग तक सीमित न रहे कार्रवाई

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई कई बार सैंपल लेने तक सीमित दिखाई देती है। सवाल यह है कि सैंपलिंग के बाद मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर क्या प्रभावी कार्रवाई होती है? खाद्य लाइसेंस, स्वच्छता, पंजीयन और अन्य वैधानिक व्यवस्थाओं की नियमित जांच की जाए तो कई खामियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

नाम में धार्मिक पहचान, परोसा जा रहा मांसाहार?

एक अन्य गंभीर सवाल सामाजिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। कुछ प्रतिष्ठानों के नाम या ब्रांड में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े नाम इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें हैं, जबकि वहां मांसाहारी खाद्य पदार्थ परोसे जाने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा हो रहा है तो ग्राहकों को खाद्य पदार्थ की प्रकृति स्पष्ट रूप से बताना और किसी भी प्रकार के भ्रम से बचाना जरूरी है।

ऑनलाइन ऑर्डर करने वाले ग्राहक सबसे ज्यादा अनजान

जोमैटो और स्विगी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भोजन मंगाने वाले ग्राहक किचन की वास्तविक स्थिति नहीं देख सकते। वे केवल मेन्यू, फोटो और प्रतिष्ठान की जानकारी के आधार पर भोजन का ऑर्डर करते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों की जिम्मेदारी संबंधित प्रतिष्ठान के साथ-साथ निगरानी तंत्र पर भी आती है।

जांच व्यवस्था पर अब उठ रहे सवाल

सवाल केवल एक-दो प्रतिष्ठानों का नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था का है। यदि खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा होटल, रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड सेंटर, ठेले और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित और प्रभावी जांच की जाए तो खाद्य गुणवत्ता, स्वच्छता और लाइसेंस संबंधी कई खामियां सामने आ सकती हैं।

अब देखना यह होगा कि विभाग केवल औपचारिक सैंपलिंग और दिखावटी कार्रवाई तक सीमित रहता है या जमीनी स्तर पर व्यापक निरीक्षण कर खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करता है। क्योंकि मामला सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य और उनके विश्वास से जुड़ा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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