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October 11, 2026 7:05 am

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: होटल-रेस्टोरेंट से लेकर स्ट्रीट फूड तक जांच और कार्रवाई की जरूरत

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की सक्रियता पर उठे सवाल, शाकाहार-मांसाहार की अलग व्यवस्था, स्वच्छता और खाद्य तेल के पुनः उपयोग की निगरानी की मांग

CBN36 छत्तीसगढ़ ।शहर और आसपास के क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, ठेले-खोमचे, स्ट्रीट फूड सेंटर, कैटरिंग एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यदि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग अपने विभागीय दायित्वों के अनुरूप नियमित एवं प्रभावी निरीक्षण करे तो अनेक प्रतिष्ठानों में खाद्य लाइसेंस, गुमास्ता, स्वच्छता, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और रसोई की व्यवस्था से संबंधित अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य की अलग व्यवस्था केवल कागजों तक?

कई स्थानों पर शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक ही परिसर में तैयार किए जाते हैं। ग्राहकों को अलग किचन, अलग बर्तन, अलग स्टोरेज और अलग सामग्री की व्यवस्था होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, इसकी स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।

विशेष रूप से ऐसे प्रतिष्ठानों में जहां ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से भोजन ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है, वहां रसोई की स्वच्छता और खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रख-रखाव की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। ग्राहक अक्सर केवल तैयार भोजन देखते हैं; भोजन किस वातावरण में तैयार हुआ, यह उनके लिए जानना मुश्किल होता है।

एक ही खाद्य तेल का बार-बार इस्तेमाल भी चिंता का विषय

स्ट्रीट फूड, होटल और रेस्टोरेंट में खाद्य तेल के बार-बार उपयोग, साफ पानी की उपलब्धता, बर्तनों की सफाई तथा खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण की भी जांच होनी चाहिए। खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली रसोई में स्वच्छ वातावरण के बजाय गंदगी, खुले में सामग्री रखना अथवा अस्वच्छ पानी और बर्तनों का उपयोग उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

कहीं-कहीं ऐसी परिस्थितियों की शिकायतें भी सामने आती हैं जहां रसोई के आसपास ही बाथरूम, बर्तन धोने की जगह और खाद्य पदार्थ तैयार करने की व्यवस्था होती है। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

सड़क किनारे खाद्य कारोबार में भी हो प्रभावी निगरानी

रोड किनारे टेंट अथवा अस्थायी ढांचों में संचालित होने वाले नॉनवेज और वेज स्ट्रीट फूड सेंटरों की भी नियमित जांच जरूरी है। खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले रंग, मसाले, तेल, सॉस और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई अमानक अथवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सामग्री उपयोग में न लाई जा रही हो।

केवल सैंपल लेने तक सीमित न रहे कार्रवाई

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई केवल समय-समय पर सैंपल लेने और कुछ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई दिखाने तक सीमित रहनी चाहिए? यदि किसी खाद्य प्रतिष्ठान में लगातार नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो केवल नमूना लेने के बजाय लाइसेंस, स्वच्छता व्यवस्था, भंडारण, किचन की स्थिति और अन्य निर्धारित मानकों की भी समग्र जांच होनी चाहिए।

यदि खाद्य सामग्री वास्तव में अमानक पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई और सुधार की प्रक्रिया सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी होनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

होटल-रेस्टोरेंट के साथ ऑनलाइन फूड डिलीवरी किचन की भी जांच जरूरी

आज बड़ी संख्या में ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से भोजन मंगाते हैं। इसलिए केवल सामने से दिखाई देने वाले होटल या रेस्टोरेंट की जांच पर्याप्त नहीं है। जिन किचन से ऑनलाइन ऑर्डर तैयार होकर ग्राहकों तक पहुंचते हैं, उनकी भी खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, लाइसेंस, स्टोरेज और कच्चे एवं तैयार खाद्य पदार्थों की व्यवस्था की जांच आवश्यक है।

धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं से जुड़े नामों को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी

एक अन्य महत्वपूर्ण विषय खाद्य प्रतिष्ठानों के नामकरण और वहां परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों से जुड़ा है। यदि कोई प्रतिष्ठान किसी धार्मिक, सांस्कृतिक अथवा विशेष पहचान से जुड़े नाम का इस्तेमाल करता है, तो उसके द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे खाद्य पदार्थों की प्रकृति के संबंध में ग्राहकों को स्पष्ट और सही जानकारी मिलनी चाहिए।

यदि किसी प्रतिष्ठान के नाम, मेन्यू या प्रचार से ग्राहक को शाकाहारी भोजन की धारणा बनती है, जबकि वहां मांसाहारी खाद्य भी तैयार या परोसा जाता है, तो ऐसी स्थिति में भ्रामक प्रस्तुतीकरण या उपभोक्ता को भ्रमित करने की किसी भी संभावना की जांच संबंधित नियमों के तहत की जानी चाहिए। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य की प्रकृति स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना ग्राहक के अधिकार और पारदर्शिता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

जिला प्रशासन और नगर निगम को संयुक्त अभियान चलाने की जरूरत

खाद्य सुरक्षा केवल खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। जिला प्रशासन, नगर निगम, खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा आवश्यकता के अनुसार अन्य संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग, डेयरी, स्ट्रीट फूड, ठेले-खोमचे और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच करनी चाहिए।

जांच के दौरान फूड लाइसेंस, गुमास्ता, स्वच्छता, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, किचन की स्थिति, पानी की गुणवत्ता, खाद्य तेल, भंडारण, शाकाहारी-मांसाहारी खाद्य की पृथक व्यवस्था तथा सार्वजनिक सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।

सवाल अब व्यवस्था से है

आम नागरिक अपने भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर संबंधित विभागों पर भरोसा करता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या मौजूदा निरीक्षण व्यवस्था वास्तव में जमीनी स्तर पर प्रभावी है? क्या कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है?

जरूरत केवल दिखावटी कार्रवाई की नहीं, बल्कि नियमित, पारदर्शी और निष्पक्ष निरीक्षण व्यवस्था की है। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ सुधार भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे और आम नागरिक को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।

अब देखना यह है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन, जिला प्रशासन और नगर निगम इस दिशा में व्यापक जांच अभियान चलाते हैं या फिर व्यवस्था इसी तरह शिकायतों और औपचारिक कार्रवाइयों के बीच चलती रहती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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