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August 2, 2026 9:16 pm

नए आपराधिक कानूनों से न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव, डिजिटल सिस्टम से मिलेगा त्वरित न्याय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

CBN36 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून देश की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आए हैं। इनका उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, वैज्ञानिक साक्ष्य और आधुनिक प्रणालियों के समावेश से न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनी है।

मुख्यमंत्री रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 150 वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था स्थापित करना है, ताकि पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून से बच न सकें।

डिजिटल साक्ष्यों को मिली कानूनी मान्यता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कानून उस समय बनाए गए थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों का स्वरूप बदल चुका है। नए कानूनों में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को मजबूती दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा शुरू होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। वहीं ई-साक्ष्य प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है।

ई-समन और न्याय श्रुति से तेज हुई न्यायिक प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले समन की तामील में कई दिन लगते थे, लेकिन अब ई-समन के जरिए सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। वहीं न्याय श्रुति प्रणाली न्यायालयीन कार्यवाही का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ ऑनलाइन और हाइब्रिड सुनवाई को अधिक प्रभावी बना रही है।

प्रदेश के सभी थाने ऑनलाइन, करीब दो लाख एफआईआर दर्ज

मुख्यमंत्री ने बताया कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के जरिए देशभर के पुलिस थाने आपस में डिजिटल रूप से जुड़े हैं, जिससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं और अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

आईसीजेएस से संस्थाओं के बीच बढ़ा समन्वय

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के माध्यम से न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित हुआ है। इससे सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान हो रहा है और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम हुई है।

नौ नए साइबर थाने शुरू

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कानूनों से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हुई है। साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने नौ नए साइबर थाने शुरू किए हैं और व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का नियमित प्रशिक्षण, क्षमता विकास और मॉनिटरिंग जरूरी है।

छत्तीसगढ़ बनेगा डिजिटल न्याय प्रणाली में अग्रणी : मुख्य न्यायाधीश

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि इन कानूनों की सफलता केवल लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार कर रही हैं। ई-साक्ष्य साक्ष्य प्रबंधन की समग्र और एकीकृत प्रणाली है, जिससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से शुरू होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत बनेगी। उन्होंने बताया कि जून माह में जिला न्यायालयों में 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता दी है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक संचार में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

‘वन डेटा, वन एंट्री’ पर होगा काम : विजय शर्मा

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा आईसीजेएस की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिससे न्याय व्यवस्था के डिजिटलीकरण में तेजी आई है।

उन्होंने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित होने से रोकना और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय दिलाना है। उन्होंने “वन डेटा, वन एंट्री” की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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