बिलासपुर CBN36 । जिले के कोटा विकासखंड की ग्राम पंचायत नवागांव कर्रा के मजौलीपारा में मनरेगा के तहत बनाई गई सामुदायिक डबरी गांव के लिए बहुउद्देशीय परिसंपत्ति बन गई है। वर्षा जल संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित इस डबरी ने न केवल भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद की है, बल्कि किसानों को सिंचाई, ग्रामीणों को मत्स्य पालन और स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी नया आधार दिया है।

करीब 5.11 लाख रुपये की लागत से ग्राम पंचायत ने तकनीकी मार्गदर्शन में मनरेगा के पात्र श्रमिकों के माध्यम से डबरी का निर्माण कराया। गांव के मुक्तिधाम के पास वर्षों से बारिश का पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, जिससे गर्मियों में जल संकट और सिंचाई की समस्या बनी रहती थी। डबरी बनने के बाद वर्षा जल का प्रभावी संचयन होने लगा है।
डबरी के कारण आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण बढ़ा है और किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा है। इससे खेती की गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। जल उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीणों ने मत्स्य पालन भी शुरू किया है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है।
डबरी का पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। वर्षा जल के अनियंत्रित बहाव पर रोक लगने से मिट्टी का कटाव कम हुआ है और आसपास हरियाली बढ़ी है। इससे ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
मुक्तिधाम के समीप स्थित होने के कारण यह डबरी सामाजिक दृष्टि से भी उपयोगी साबित हुई है। अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक परिस्थितियों में अब पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। साथ ही गांव के अन्य सामुदायिक कार्यों में भी इसका उपयोग किया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार यह सामुदायिक डबरी जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, कृषि विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग का सफल उदाहरण बनकर उभरी है। अब यह मॉडल आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन रहा है।
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