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July 22, 2026 3:27 pm

सिम्स में पहली बार VATS तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन का सफल ऑपरेशन

बिलासपुर CBN36।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने पहली बार आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) के जरिए टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़ों के आसपास पानी भरने) से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन कर नई उपलब्धि हासिल की है। इस तकनीक के शुरू होने से अब ऐसे जटिल वक्ष एवं फेफड़ों से जुड़े रोगों का उपचार बिलासपुर में ही संभव होगा और मरीजों को बड़े शहरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

मरीज पिछले तीन माह से लगातार बुखार से पीड़ित था। निजी अस्पतालों में उपचार और टाइफाइड की दवाएं लेने के बावजूद उसे राहत नहीं मिली। जांच में दाहिने फेफड़े के आसपास अधिक मात्रा में पानी जमा होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उसे सिम्स के टीबी विभाग में भर्ती किया गया, जहां जांच के बाद ट्यूबरक्लोसिस प्लूरल इफ्यूजन का निदान हुआ और एंटी-ट्यूबरक्लोसिस ट्रीटमेंट (ATT) शुरू किया गया। बार-बार प्लूरल टैपिंग के बावजूद पानी दोबारा भरने पर मरीज को जनरल सर्जरी विभाग भेजा गया।

टीबी, जनरल सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने VATS तकनीक से ऑपरेशन किया। इस दौरान फेफड़े के आसपास जमा द्रव निकाला गया तथा आवश्यक डिकॉर्टिकेशन और बायोप्सी की गई। ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। फिलहाल मरीज स्वस्थ है और नियमित फॉलो-अप पर है।

ऑपरेशन जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. कोमल प्रसाद देवांगन, डॉ. विनोद तमकनंद और डॉ. सुशील पात्रे ने किया। इसमें डॉ. ऋतेश, डॉ. गरिमा शर्मा, टीबी एवं चेस्ट विभाग के डॉ. अनिल डरसेना और उनकी टीम का सहयोग रहा। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति और उनकी टीम ने सुरक्षित एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी निभाई।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि VATS मशीन उपलब्ध होने के बाद यह पहला सफल ऑपरेशन किया गया है। पहले इस तरह के 10 से 12 मरीज हर महीने उच्च संस्थानों के लिए रेफर करने पड़ते थे, लेकिन अब उन्हें सिम्स में ही आधुनिक उपचार मिल सकेगा।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि निजी अस्पतालों में इस सर्जरी पर एक से दो लाख रुपये तक खर्च आता है, जबकि सिम्स में यह सुविधा निर्धारित शासकीय शुल्क और आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों को आर्थिक राहत के साथ महानगरों में इलाज कराने की परेशानी से भी मुक्ति मिलेगी।

विशेषज्ञों ने सलाह दी कि लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस फूलना या फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और आधुनिक VATS तकनीक से ऐसे जटिल मामलों का भी सुरक्षित एवं सफल उपचार संभव है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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