बिलासपुर। शहर के सीएमडी चौक स्थित आईएमए सभा भवन में रविवार को कथित मतांतरण गतिविधियों के आरोप को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तथा प्रलोभन देकर ईसाई धर्म का प्रचार और मतांतरण कराने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। बाद में संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने तारबाहर थाने पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आईएमए सभा भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों द्वारा आर्थिक सहायता, निःशुल्क चिकित्सा, बेहतर जीवन और अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर हिंदू समाज के लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही मौके के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटो, दस्तावेज, मोबाइल रिकॉर्ड तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एकत्र कर साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराध दर्ज किया जाए।
हिंदू संगठनों का कहना है कि जिले में इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि मतांतरण रोकने के लिए कानून होने के बावजूद उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने से ऐसी गतिविधियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
इधर, तारबाहर थाना पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
क्या है शिकायत
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान आर्थिक सहायता, मुफ्त इलाज, बेहतर जीवन और अन्य प्रलोभनों का लालच देकर लोगों को मतांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा था। उन्होंने मांग की है कि पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ बीएनएस और छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत कार्रवाई करे।
पुलिस का पक्ष
तारबाहर पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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