बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार दर्ज किए गए दुर्लभ प्रवासी पक्षी कैस्पियन प्लोवर के रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। प्रतिष्ठित शोध पत्रिका इंडियन बर्ड्स ने 29 जून 2026 को प्रकाशित अपने जर्नल में इस महत्वपूर्ण अवलोकन को शोध पत्र के रूप में प्रकाशित किया है। यह प्रकाशन न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे मध्य भारत की पक्षी विविधता के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह उपलब्धि बिलासपुर के पक्षी प्रेमी सत्यप्रकाश पांडेय और कंचन पांडेय के पक्षी अवलोकन से जुड़ी है। वहीं, छत्तीसगढ़ के पक्षी विशेषज्ञ प्रतीक ठाकुर ने इस अवलोकन का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए शोध पत्र तैयार किया और उसके प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शोध के अनुसार, छत्तीसगढ़ और पड़ोसी मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत में इससे पहले कैस्पियन प्लोवर का कोई प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। ऐसे में यह अवलोकन छत्तीसगढ़ में इस प्रजाति का पहला दर्ज रिकॉर्ड माना गया है। शोध में उल्लेख किया गया है कि यह खोज मध्य भारत के मौसमी घास के मैदानों और आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्रों के महत्व को रेखांकित करती है, जो प्रवासी जल एवं तटीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव का कार्य करते हैं। साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि यह प्रजाति पहले की तुलना में अधिक व्यापक क्षेत्र में पाई जा सकती है।
शोध पत्र के अनुसार, 4 सितंबर 2025 को बिलासपुर के मोहनभाटा क्षेत्र में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान सत्यप्रकाश पांडेय और कंचन पांडेय ने इस दुर्लभ पक्षी को देखा। यह क्षेत्र खुले घास के मैदान, चरागाह और छोटे मौसमी तालाबों के कारण विभिन्न प्रवासी पक्षियों का अनुकूल आवास माना जाता है। उस दौरान पैसिफिक गोल्डन प्लोवर, लिटिल रिंग्ड प्लोवर और केंटिश प्लोवर सहित कई प्रजातियां भी दर्ज की गई थीं।
इसी बीच तीन लिटिल रिंग्ड प्लोवर के साथ भोजन खोजते हुए एक पक्षी अलग दिखाई दिया। उसके शारीरिक स्वरूप, रंग, चोंच, पैरों की बनावट तथा छाती पर मौजूद विशिष्ट ग्रे-भूरे रंग की पट्टी समेत अन्य पहचान संबंधी विशेषताओं के आधार पर उसकी पहचान कैस्पियन प्लोवर के रूप में की गई। शोध में ग्रेटर सैंड प्लोवर और तिब्बती सैंड प्लोवर से इसकी वैज्ञानिक तुलना भी प्रस्तुत की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड छत्तीसगढ़ की पक्षी जैव विविधता के दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और भविष्य में इस क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों पर होने वाले शोध को नई दिशा प्रदान करेगा।
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