छत्तीसगढ़ की सियासत में गर्माहट ही गर्माहट
छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों कुछ ज्यादा ही गरमाई हुई है। अब देखिए ना, सीएम हाउस से मंत्रियों को कॉल आया और अर्जेंट बुलावा भी। बस फिर क्या, सियासत सत्ताधारी दल में ही नहीं विपक्षी कांग्रेस में भी उसी अंदाज में गरमा गई। सियासत से जुड़े राजनीतिक पंडितों ने तो भविष्यवाणी भी करना शुरू कर दिया था। भविष्यवाणी का मतलब तो समझ ही रहे होंगे। सीएम की टीम से कौन बाहर हो रहे हैं और बाहर होने वालों को कौन-कौन रिप्लेस हो रहे हैं। गणित और गुणा भाग के बीच यह समय भी निकल गया। राजनीतक पंडितों के गुणा भाग के बीच आप यकीन नहीं करेंगे, चार से पांच मंत्रियों की बीपी हाई तो हुई, डॉक्टरों से सलाह मशविरा तक लेना पड़ गया। बीपी हाई का मतलब समझ रहे हैं ना, पता नहीं सीएम हाउस जाते तक और वहां से निकलते तक क्या हो जाए। बहरहाल कुर्सी तो बच गई, सवाल यह कितने दिनों के लिए।
दिल्ली में सरगर्मी और छत्तीसगढ़ में हलचल
बीते तीन चार दिनों से दिल्ली की सियासत में बेहद गर्मी दिखाई दे रही है। मंत्रिमंडल में शामिल और वेटिंग इन मिनिस्टर, गर्मी की तपन को ये लोग कुछ ज्यादा ही महसूस कर रहे हैं। दिल्ली की गर्मी की आंच छत्तीसगढ़ में भी पहुंचने लगी है। सीएम और डिप्टी सीएम के दिल्ली दौरे के बाद जिस तरह दिग्गज नेताओं का दिल्ली दौड़ शुरू हुई है, केंद्र की राजनीति में होने वाली हलचल का ही तो असर है। वैसे भी ढाई साल का समय गुजर गया है। अब ढाई साल ही तो बाकी है, एक साल जाते-जाते छत्तीसगढ़ में चुनावी माहौल बनने लगा है। चुनावी माहौल बने इसके पहले मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा और सुगबुगाहट दोनों सुनाई देने लगी है। सत्ता से जुड़े और सियासत की नब्ज को बखूबी पहचानने वाले भाजपाई दिग्गजों की मानें, तो गुजरात मॉडल छत्तीसगढ़ में भी नजर आएगा।
संगठन सृजन बनाम चुनावी तैयारी
कांग्रेस में संगठन सृजन का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में अमृत मंथन का असर कितना आएगा यह तो वक्त बताएगा, कांग्रेस नेता राहुल के दौरे के बाद कांग्रेस पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आने लगी है। इस बीच पीसीसी चेयरमैन को लेकर जिस तरह कुर्सी दौड़ चल रही है,इसे भी कांग्रेस के रणनीतिकार अच्छा ही मान रहे हैं। राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद भी जिस तरह कांग्रेस में सियासत तेजी के साथ दौड़ रही है, रणनीतिकारों के लिए यह अच्छा ही है। कांग्रेसी रणनीतिकार, संगठन के पदाधिकारियों को चुनावी मोड में ला रहे हैं। इसके जरिए कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने की तैयारी है। अगर यह काम हो गया तो फिर कहने ही क्या। आगे-आगे देखते जाइए होता है क्या।
अध्यक्ष की होने लगी चर्चा
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को फिलहाल दो साल से कुछ ज्यादा ही बचा है। ये भी देखते-देखते निकल ही जाएगा। समय निकले इसके पहले नब्ज टटोलने में महारत हासिल रणनीतिकारों ने अपनी तैयारी अभी से ही शुरू कर दी है। प्री इलेक्शन तैयारी तो दोनों ही दलों में हो रही है। तैयारियों के बीच सत्ता और विपक्षी दोनों ही दलों में प्रदेश अध्यक्ष की चर्चा छिड़ गई है। भाजपा में दिल्ली से नाम तय होंगे। जिस एक नाम पर चर्चा हो रही है, उसे लेकर अटकलें लगनी शुरू हो गई है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के नाम को लेकर भाजपा में सरगर्मी बढ़ी हुई है। भाजपाई रणनीतिकार ओबीसी राजनीति पर एक बार फिर फोकस करते दिखाई दे रहे हैं। ओबीसी उसमें भी साहू पर कुछ ज्यादा ही फोकस नजर आ रहा है। सब-कुछ ठीक रहा और दिल्ली राजी हो गई तो एक बार फिर भाजपा विधानसभा चुनाव में ओबीसी चेहरे को लेकर सामने आएगी। कांग्रेस में अध्यक्ष पद के चार दावेदार नजर आ रहे हैं। पूर्व सीएम की चली तो कौन।
अटकलबाजी
सीएम हाउस में अर्जेंट मीटिंग का कॉल अटेंड करने के बाद किस मंत्री का बीपी हाई हो गया था। डॉक्टर से क्यों सलाह लेनी पड़ गई थी। तब और अब क्या माहौल है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल की चल गई तो पीसीसी चेयरमैन की कुर्सी पर कौन आएंगे नजर।
प्रधान संपादक


