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June 10, 2026 4:21 pm

बिलासपुर रेंज में पुलिस अधिकारियों के लिए कार्यशाला: मरणासन्न कथन और वैज्ञानिक विवेचना पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण

पुलिस महानिरीक्षक रेंज राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित हुई कार्यशाला,लगभग 200 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़।27 मई 2026।गंभीर अपराधों की विवेचना को त्रुटिहीन बनाने और न्यायालयों में दोषसिद्धि (Conviction Rate) दर में वृद्धि करने के उद्देश्य से आज बिलासपुर रेंज स्तरीय एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला आईजी रेंज राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।

विवेचना में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक साक्ष्य मृत्यु पूर्व कथन (Dying Declaration), डीएनए रिपोर्ट और भौतिक साक्ष्य किसी भी जघन्य अपराध की विवेचना की रीढ़ होते हैं।विवेचना के दौरान की गई छोटी-छोटी कानूनी त्रुटियां आरोपियों को बरी होने का रास्ता दे सकती हैं, इसलिए विवेचकों का विधिक और तकनीकी रूप से अपडेट होना अनिवार्य है।

विषय विशेषज्ञ एवं शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर ने मरणासन्न कथन भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 26 पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा प्रश्नोत्तर शैली में दर्ज किए गए बयानों को न्यायालय अधिक विश्वसनीयता प्रदान करता है।उन्होंने कहा कि किसी भी कथन को दर्ज करने से पूर्व और बाद में पीड़ित की मानसिक स्थिति के संबंध में डॉक्टर का प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। इसमें चूक होने पर न्यायालय में साक्ष्य की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। इसलिए विवेचकों को कार्यशाला में विवेचना की गुणवत्ता सुधारने के लिए सख्त निर्देश दिए गए चालान प्रस्तुत करते समय कॉपी-पेस्ट जैसी त्रुटियों से बचने की हिदायत दी गई साथ ही एफएसएल रिपोर्ट में रक्त समूह का मिलान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 एससी-एसटी एक्ट मामलों की जांच के दौरान जातिसूचक शब्दों का स्पष्ट और तथ्यात्मक उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए और गवाहों को न्यायालय में बयान दर्ज कराने से पूर्व विधिक रूप से बेहतर तैयारी करवाई जाए और प्रदर्शों की जप्ती एवं सैम्पलिंग की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जानी चाहिए।

लगभग 200 अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

आयोजित कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल ने किया। इस ऑनलाइन सत्र में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। सत्र के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रशिक्षक श्री ठाकुर द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग द्वारा सफल प्रशिक्षण हेतु श्री रजनीकांत ठाकुर को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विवेचना की गुणवत्ता सुधारने तथा न्यायालयों में दोषसिद्धि प्रतिशत बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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