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May 4, 2026 6:57 pm

आवाज़ का असर: शिक्षा विभाग में शिकायतों के बाद जांच तेज, निर्णायक मोड़ पर मामला

“अंकित गौरहा ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है, जब तक शिक्षकों को उनका अधिकार नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा”

बिलासपुर। शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पिछले तीन महीनों से जारी शिकायतों और प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा द्वारा उठाए गए मामलों के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और कई मामलों में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

लगातार शिकायतों से बढ़ा दबाव

अंकित गौरहा ने बीते तीन महीनों के दौरान शिक्षा विभाग में पदोन्नति, युक्तिकरण, अनुकंपा नियुक्ति सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए 20 से अधिक शिकायतें संबंधित अधिकारियों को सौंपी थीं। इन शिकायतों में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, कलेक्टर, कमिश्नर और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।
इन दस्तावेजी शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की स्थिति बनती नजर आ रही है।

नई शिकायत से तेज हुई जांच की मांग

हाल ही में गौरहा ने संयुक्त संचालक शिक्षा, बिलासपुर को एक और विस्तृत शिकायत सौंपकर मामला फिर से चर्चा में ला दिया है। इस शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में आरोप है कि पदोन्नति आदेशों में नियमों की अनदेखी की गई, वरिष्ठता सूची का पालन नहीं किया गया तथा न्यायालय के निर्देशों के बावजूद संशोधित आदेश जारी कर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

शिक्षकों के अधिकारों का मुद्दा

अंकित गौरहा ने इस पूरे प्रकरण को शिक्षकों के सम्मान और उनके अधिकारों से जुड़ा विषय बताया है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना संभव नहीं है।

प्रशासनिक हलचल और बढ़ता दबाव

मामले में बढ़ती शिकायतों और साक्ष्यों के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी पर संभावित कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है, वहीं संयुक्त संचालक स्तर पर भी जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि मामला अब उच्च स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।

व्यवस्था सुधार की लड़ाई

गौरहा ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षकों को उनका अधिकार नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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