वर्धा,महाराष्ट्र । द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखते हुए राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दें।
राष्ट्रपति मुर्मु महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वर्धा वह भूमि है, जिसे महात्मा गांधी का सान्निध्य प्राप्त हुआ और उनके विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने में विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए पदक विजेताओं की विशेष सराहना की। साथ ही कहा कि नवाचार, मूल्य-आधारित शिक्षा और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से ही आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत का निर्माण संभव है। राष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर बल देते हुए कहा कि अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, किंतु मातृभाषा को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति ने सेवाग्राम आश्रम की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उन्हें गांधीजी के सादगीपूर्ण जीवन, राष्ट्रप्रेम और समाजसेवा से प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, जिससे अंतरभाषीय संवाद को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होंगे और इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए युवाओं, विशेषकर युवतियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दीक्षांत समारोह में छात्राओं द्वारा अधिक पदक प्राप्त करने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।

इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर तथा कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा उपस्थित थीं।
राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को सदाचार, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। वहीं, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों विभिन्न संकायों के आठ विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, कुलाधिपति पदक तथा सर्वोदया रत्नमाला तु. बोरकर स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओमप्रकाश भारती ने किया। समारोह में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्रधान संपादक


