वर्धा।सामाजिक नीति अनुसंधान प्रकोष्ठ एवं वर्धा समाज कार्य संस्थान, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के संयुक्त तत्वावधान में ‘मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 : सम्मान और उपचार’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए वर्धा समाज कार्य संस्थान के निदेशक प्रो. के. बालराजु ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से ही मानसिक रोगियों को वास्तविक सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता और नीतिगत हस्तक्षेप का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

मुख्य वक्ता निशिकांत शेंडे, समाजसेवा अधीक्षक (मनोविकृति), जिला अस्पताल वर्धा ने अपने व्याख्यान की शुरुआत एक विचारोत्तेजक प्रश्न से करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य के लिए पृथक अधिनियम की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 न केवल उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि मानसिक रोगियों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार भी सुनिश्चित करता है।
शेंडे ने कहा कि यह अधिनियम समाज में मानसिक रोगों से जुड़े कलंक (स्टिग्मा) को कम करने में सहायक है तथा इससे समाज में सम्मान और संवेदनशीलता का वातावरण विकसित होता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिव सिंह बघेल ने किया, जबकि डॉ. श्रीनिकेत मिश्र ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. गजानन निलामे, डॉ. शिवाजी जोगदंड, डॉ. ज्योति कुमारी, डॉ. अंकित कुमार पाण्डेय सहित विधि विभाग के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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