
“बड़े राजनीतिक पृष्ठभूमि के कद्दावर नेता को लेकर कृषि मंत्री की ऐसी हल्की बातें आखिर क्यों ,अब तो भाजपा शिविर में ही इस बात की चर्चा ,मसखरे मंत्री ने यह सब बोलकर कर दिया अपनी ही किरकिरी ”
बिलासपुर। शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ कृषि मंत्री रामविचार नेताम बिलासपुर प्रवास पर आए थे। सीएम ने गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास और गौधाम का लोकार्पण किया। इस अवसर पर एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार ने जो कुछ कहा, उसे लेकर अब चर्चा का बाजार सरगर्म है। भाजपा के दिग्गज नेता से लेकर पदाधिकारी व कार्यकर्ता मंत्री नेताम के इस तरह की बातों को लेकर ना केवल असहज महसूस कर रहे हैं, साथ भाजपा के पूर्व कद्दावर मंत्री व विधायक को लेकर जो टिप्पणी की उसे ना तो औपचारिक और ना ही अनौपचारिक रूप से उचित नहीं मान रहे हैं। सत्ताधारी दल में ही इसे लेकर बहस छिड़ गई है।
मंत्री राम विचार ने मंच से जो कुछ कहा हम उसे हुबहू उसी अंदाज में रख रहे हैं। बकौल मंत्री नेताम, मंच पर बिलासपुर के कलेक्टर मौजूद हैं। अच्छा काम कर रहे हैं, लोकप्रिय भी हैं। विधायक अमर जी कुर्सी खतरे में है। कार्यक्रम पर आते हैं। कार्यक्रम विशुद्ध रूप से गौ संरक्षण और संवर्धन के साथ ही किसानों के लिए थे। अन्नदाता और गौमाता के संरक्षण संवर्धन को लेकर आयोजित कार्यक्रम में इस तरह की राजनीति को लेकर पार्टी के भीतर ही अब कार्यकर्ता से लेकर दिग्गज पदाधिकारी असहज महसूस करने लगे हैं। सवाल यह भी उठा रहे हैं, आखिर कृषि मंत्री को इस तरह की बातें और वह भी भीड़ भरी सभा के बीच करने की जरुरत ही क्या थी। सियासी समीकरण पर नजर डालें तो मंत्री नेताम उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में सक्रिय हैं और उस इलाके का ही प्रतिनिधित्व करते हैं।

छत्तीसगढ़ की सियासत में अमर अग्रवाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि ऐसी कि छत्तीसगढ़ से लेकर मध्य प्रदेश और दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति में ना तो वे अनजान चेहरे हैं और ना ही पहचान की मोहताज। अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का दौर हो या फिर भाजपा की पहल सरकार में सीएम बनाने से लेकर मंत्रिमंडल गठन की बात हो, छत्तीसगढ़ भाजपा के पितृ पुरुष कहे जाने वाले स्व लखीराम अग्रवाल की भूमिका से ना तो इंकार किया जा सकता और ना ही इसमें कोई संशय है। जब तक वे रहे प्रदेश भाजपा की राजनीति उनके इर्द-गिर्द घुमती रही। स्व लखीराम अग्रवाल के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में अमर अग्रवाल सामने आए। अपनी कार्यशैली और कामकाज के तरीके से सत्ता से लेकर संगठन तक अपनी अलग और विशिष्ट पहचान बनाई। डेढ़ दशक तक राज्य के मंत्रिमंडल में अहम पदों पर काबिज रहे और अपने कामकाज की शैली से लोगों के बीच तो अपनी पहचान बनाई, आईएएस लॉबी के रूप में उनकी अलग छवि और पहचान बनी। रिजल्ट देने वाले मंत्री के रूप में उनकी छवि बनी। अब सवाल यह उठता है, एक बड़े राजनीतिक पृष्ठभूमि के कद्दावर नेता को लेकर कृषि मंत्री ने ऐसी हल्की बातें आखिर क्यों की। अब तो भाजपा शिविर में ही इस बात की चर्चा होने लगी है कि मसखरे मंत्री ने यह सब बोलकर अपनी ही किरकिरी करा डाली है।
कलेक्टर का कामकाज बेहद सकारात्मक

बिलासपुर जिले के कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल की पूरी नजरें केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसके संचालन पर टिकी हुई है।बिलासपुर एसडीएम के तौर पर काम कर चुके हैं। जिले की राजनीति और भौगोलिक क्षेत्र से वे पूरी तरह परिचित हैं। पुराने कार्यकाल का अनुभव और जिले से पूर्व परिचित होने के कारण भी उनको काम करने में आसानी हो रही है और अच्छा रिजल्ट भी दे रहे हैं। चर्चा तो यह भी है, हो सकता है मंत्री ने उनका हौसला बढ़ाने के लिए यह सब कह दिया हो। बहरहाल कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल के कामकाज को लेकर सीएम से लेकर आला अफसरों के बीच बेहतर रिजल्ट है।
राजनीति में कई बार मंच से कही गई छोटी-सी बात भी बड़े संकेत छोड़ जाती है। मंत्री नेताम की टिप्पणी भी फिलहाल उसी श्रेणी में देखी जा रही है जहां एक वाक्य ने राजनीतिक विश्लेषण और चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह महज एक टिप्पणी साबित होती है या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी संदेश है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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