बिलासपुर जांजगीर-चांपा कोरबा मुंगेली एवं रायगढ़ जैसे विभिन्न जिलों में सब इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर और बाद में डीएसपी के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं, 2018 में डीएसपी पद पर पदोन्नति के बाद मुंगेली तथा रायगढ़ में प्रभावी प्रशासनिक भूमिका

रायगढ़ छत्तीसगढ़ 31 जनवरी।पुलिस सेवा जैसे चुनौतीपूर्ण और परंपरागत रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले क्षेत्र में 38 वर्षों तक निरंतर सेवा देना अपने आप में साहस और संकल्प का उदाहरण है। उप पुलिस अधीक्षक डीएसपी साधना सिंह पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुईं। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायगढ़ में आयोजित सेवा सम्मान कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक बन गया।
अविभाजित मध्यप्रदेश के जिला जगदलपुर से उप निरीक्षक पद पर सेवा प्रारंभ करने वाली साधना सिंह ने उस दौर में पुलिस की वर्दी पहनी जब महिला अधिकारियों की संख्या अत्यंत सीमित थी। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने न केवल स्वयं को स्थापित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला पुलिसकर्मियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जांजगीर-चांपा कोरबा मुंगेली एवं रायगढ़ जैसे विभिन्न जिलों में सब इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर और बाद में डीएसपी के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2018 में डीएसपी पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने मुंगेली तथा रायगढ़ में प्रभावी प्रशासनिक भूमिका निभाई। वे पिछले डेढ़ वर्ष से पुलिस मुख्यालय रायगढ़ में पदस्थ थीं।
सेवा सम्मान समारोह में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस शशि मोहन सिंह ने शॉल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साधना सिंह ने यह सिद्ध किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन के बल पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कार्य और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाकर समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कार्यक्रम में डीएसपी साधना सिंह के परिवारजन पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तथा शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उनकी विदाई केवल एक सेवानिवृत्ति नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक यात्रा के सफल समापन के रूप में देखी गई।
प्रधान संपादक


