बारनवापारा में आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
रायपुर, 30 जनवरी 2026। बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रशिक्षु आईएफएस भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एक विशेष व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य भावी वन सेवा अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर उपयोग में आने वाली तकनीकों एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना रहा।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग कर अपनी दक्षता विकसित करें तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए सतत प्रयास करें। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

प्रशिक्षण सत्र में मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव एवं क्षेत्रीय निदेशक सुश्री स्तोविषा समझदार ने डीजीपीएस डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली उपयोगिता तथा वन सर्वेक्षण सीमांकन और प्रबंधन में इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डीजीपीएस आधारित सर्वेक्षण से वन क्षेत्रों में सटीक एवं विश्वसनीय डेटा संग्रह संभव होता है जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इसी क्रम में उप-निदेशक उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व वरुण जैन ने गज संकेत मोबाइल एप्लिकेशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग मानवहाथी संघर्ष प्रबंधन तथा त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल उपकरण है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग डेटा एंट्री एवं प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक डिजिटल टूल्स एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य के अधीक्षक कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अभ्यारण्य की भौगोलिक पारिस्थितिक एवं संरक्षण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों को वनभैंसा संरक्षण केंद्र ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र ग्रासलैंड विकास क्षेत्रों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया गया जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
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