शिक्षा विभाग में जो ना हो कम ही है
बिलासपुर डीईओ कार्यालय इन दिनों काफी चर्चा में है। ऐसा भी कह सकते हैं कि प्रदेश में सबसे चर्चित अगर कोई सरकारी दफ्तर है तो वह बिलासपुर का डीईओ कार्यालय ही है। इस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कहने ही क्या है, अपने ही कर्मचारियों से घुसखोरी का मौका नहीं छोड़ते। विधवा महिला से पति के पेंशन ग्रेज्युटी निकालने के एवज में लाखों रुपये लेनदेन का मामला अब भी पेंडिंग है। इस बीच अनुकंपा नियुक्ति, अटैचमेंट के नाम पर लाखों रुपये की घुसखोरी का बड़ा मामला सामने आ गया है। इस खेल में सुनील बाबू की बड़ी भूमिका भी सामने आई है। डीईओ कार्यालय का सिस्टम ही ऐसे बना कर रखे हैं कि बिना चढौत्री कुछ होता ही नहीं है। कलेक्टर के निर्देश पर जब जांच हुआ तो हैरान करने वाला वाकया सामने आया। अब कार्रवाई को लेकर नजरें लगी हुई है। देखते जाते हैं आगे आगे होता क्या है। कुछ होता है या फिर पहले जैसे फाइल दबा दी जाएगी।
मनरेगा,वीबी जी रामजी और कांग्रेसी नेता
मनरेगा को लेकर कांग्रेस ने राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ दिया है। दरअसल केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी रामजी कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का तो यहां तक आरोप है कि जिस किसी अफसर ने नाम बदला है,उसको छोड़कर भाजपाइयो को यही नहीं पता कि पूरा वीबी जी रामजी का पूरा नाम क्या है। बहरहाल इस मुद्दे पर फिर कभी चर्चा करेंगे। अभी अपनी बात पर फोकस करते हैं। मनरेगा के नाम बदलने को लेकर कांग्रेस ने पहले सदन की लड़ाई लड़ी और जब सड़क की लड़ाई शुरू कर दी है। शहर के एक ब्लॉक में मैदानी लड़ाई से पहले प्लान बनाने के लिए स्थानीय नेताओं की मीटिंग बुलाई गई थी। पीसीसी के एक पूर्व पदाधिकारी ने बोलते-बोलते ऐसा कुछ बोल गए कि अब उनकी जुबान ही उनके लिए आगे चलकर गले की फांस बन जाए तो अचरज की बात नहीं होनी चाहिए। नेताजी का वीडियो भी उनकी जुबान की तरह तेजी के सााथ सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो नेताजी के लिए परेशानी का सबब ना बन जाए। वैसे भी शुभचिंतकों की कमी नहीं है, वीडियो वायरल करने वाला दस्ता तैयार है।
मंत्री की संजीदगी से डीईओ कार्यालय में फूटा अनुकंपा नियुक्ति फर्जीवाड़ा
मंत्री हो तो तोखन साहू जैसा ही हो, शिकायतकर्ता ने तीन पेज में डीईओ कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति, अटैचमेंट सहित अन्य गड़बड़ियों को लेकर लिखित शिकायत की थी। मंत्री ने शिकायत को पढ़ा, मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर को फारवर्ड कर जांच का निर्देश दिया। कलेक्टर ने जांच बैठाई। जांच में जो कुछ सामने आया उसने सबको चौंका दिया। बाबू से लेकर अफसर सभी के हाथ घुसखोरी और भ्रष्टाचार में रंगे हुए नजर आए। अब इसमें आगे का एपीसोड की तैयारी चल रही है। देखने वाली बात ये है कि डीईओ कार्यालय से अब किस-किस की विदाई होती है। विदाई की बात आई तो आपको यह भी बता दें कि इस सूची में आधा दर्जन तो हिट लिस्ट में है। देखने वाली बात ये है कि पहला किसका और आखिर में किसका नंबर आता है।
आईजी और सशक्त ऐप
बिलासपुर रेंज के नवनियुक्त आईजी आईपीएस रामगोपाल गर्ग ने काम संभाल लिया है। शहरी थानों का निरीक्षण का दौर भी शुरू हो गया है। थानेदारों को जरुरी दिशा निर्देश और हिदायतें भी दे रहे हैं। चुस्त पुलिसिंग के बीच लोगों की सुरक्षा पर फोकस कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ का ऐसा कोई शहर नहीं है जहां लोग वाहन चोरों से परेशान और हैरान ना हो। इस बात का ख्याल आईजी को भी है। तभी तो उन्होंने आते ही सशक्त ऐप को लांच कर दिया है। जिलेभर के थानेदारों को इस ऐप को प्रभावी ढंग से चलाने और इस पर अपडेशन की हिदायत दी है। इस ऐप के जरिए चोरी गए वाहनों की पतासाजी आराम से की जा सकेगी। वाहन चोरों पर लगाम कसने और लोगों को रियायत देने के लिए इस ऐप को लांच किया गया है। आने वाले दिनों में और भी ऐप लांच होंगे। जिले की पुलिस डिजिटली अपडेट होते भी दिखाई देगी।
अटकलबाजी
मनरेगा पर बड़ा बयान सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद नेताजी का क्या होगा। सियासत में उनका भविष्य किस अंदाज में लिखा जाएगा, इस बात की अटकलें अभी से ही लगाई जा रही है। हालांकि अभी कोई चुनाव नहीं है।
केंद्रीय राज्य मंत्री शिकायत की जांच के बाद रिपोर्ट को लेकर सख्ती बरतें तो डीईओ कार्यालय से सबसे पहले किसकी विदाई होगी, कौन जेल जाएगा।
प्रधान संपादक


