बिलासपुर।लिंगियाडीह क्षेत्र में प्रस्तावित तोड़फोड़ के विरोध में चल रहा लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अपने 56वें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की ठंड और लंबे समय से जारी धरने के बावजूद आंदोलनकारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। इस दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक धरना स्थल पर पहुंचे तथा प्रशासन और सरकार से पुनर्वास व न्यायोचित समाधान की मांग की

धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि विकास के नाम पर गरीबों को बेघर करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण हो चुका है, तो अब आवासीय मकानों को तोड़कर गार्डन अथवा कॉम्प्लेक्स निर्माण का प्रस्ताव जनविरोधी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।
महिलाओं और मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति भी देखने को मिली। महिलाओं ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सर्दी के मौसम में महिलाओं और बच्चों को बेघर किए जाने की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
आदिवासी और सामाजिक संगठनों का समर्थन

सर्व आदिवासी प्रदेश युवा वर्ग अध्यक्ष सुभाष सिंह परतें ने इसे केवल मकानों की नहीं, बल्कि आदिवासी और सर्व समाज की अस्मिता से जुड़ी लड़ाई बताया। उन्होंने सभी वर्गों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया।
वहीं प्रदेश सचिव अशोक राजवाल ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष के तहत की जा रही है। एनएसयूआई अध्यक्ष रंजीत सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहा है।
मुंगेली जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मीकांत भास्कर ने पूछा कि यदि गार्डन का निर्माण होता है, तो उसका वास्तविक लाभ किन वर्गों को मिलेगा और क्या विस्थापित गरीब परिवार वहां सुविधाओं का उपयोग कर पाएंगे।
इन नेताओं ने किया संबोधन
धरना आंदोलन में श्याम मूरत कौशिक सर्व समाज प्रदेश अध्यक्ष आयुष राज प्रदेश सचिव आदिवासी समाज मनीष मरावी जनपद सदस्य कोटा अन्नपूर्णा ध्रुव महिला कांग्रेस सेवादल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपना समर्थन व्यक्त किया।
स्थानीय नागरिकों की भागीदारी
धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले विस्थापन नीति, पुनर्वास और संवाद की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।
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