ऊर्जा सुरक्षा, संस्थागत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने बिलासपुर स्थित अपने मुख्यालय में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह नेतृत्व आधारित मंथन आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप संगठन के भविष्य को आकार देने की दिशा में एक संरचित और सहभागी प्रयास के रूप में उभरा।

यह ‘चिंतन शिविर’ हाल ही में नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि में परिकल्पित किया गया था और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं के अनुरूप एसईसीएल की रणनीति को सुदृढ़ करना रहा। एसईसीएल में इस प्रक्रिया की शुरुआत परिचालन क्षेत्रों में आंतरिक चिंतन शिविरों से हुई, जो बाद में मुख्यालय स्तर पर समेकित मंथन में परिणत हुई, जिससे व्यापक सहभागिता और समग्र समीक्षा सुनिश्चित हो सकी।

चिंतन शिविर का नेतृत्व साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरिश दुहन ने किया। इसमें कार्यात्मक निदेशकों, मुख्य सतर्कता हिमांशु जैन सहित मुख्यालय और सभी परिचालन क्षेत्रों के लगभग 200 अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष तथा कार्यकारी ग्रेड–5 (ई-5) स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी शामिल थे, जो संगठन की भावी नेतृत्व क्षमता पर विशेष फोकस को दर्शाता है।
अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की अग्रणी कोयला कंपनी बनने के लिए संगठित प्रयास करने होंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सुधार केवल नीतिगत इरादों तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए उन्होंने विविधीकरण, औद्योगिक सहभागिता और नेट-जीरो रोडमैप में अग्रणी बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा विज़न 2030 और विज़न 2047 को मार्गदर्शक ढांचे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। युवा अधिकारियों को संगठन की भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संस्था में रूपांतरित करने में उनकी अग्रणी भूमिका पर विश्वास जताया।

चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा करना, कमियों की पहचान करना और कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, खान सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास पहलों तथा डिजिटलीकरण को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध कार्य योजनाओं पर विचार-विमर्श करना रहा। विज़न 2030 और विज़न 2047 से जुड़े दीर्घकालिक विषयों, जिनमें विविधीकरण, उद्योग से जुड़ाव और नेट-जीरो लक्ष्य शामिल हैं, पर भी विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी संचालन, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां, सौर एवं नवीन ऊर्जा, डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, मानव संसाधन विकास, वित्त तथा संविदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।
प्रत्येक प्रस्तुति के बाद संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी की सक्रिय भागीदारी रही। इस खुले और सहभागी मंच ने विचारों के आदान-प्रदान, नवाचारी सुझावों और रचनात्मक प्रतिक्रियाओं को प्रोत्साहित किया, जिससे शीर्ष-स्तरीय मार्गदर्शन और जमीनी स्तर से प्राप्त फीडबैक के बीच संतुलन स्थापित हुआ।
एसईसीएल का यह पहला ‘चिंतन शिविर’ नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा और संगठन की परिचालन उत्कृष्टता, सतत विकास तथा राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाएगा।
प्रधान संपादक

