बिलासपुर।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक C-ARM मशीन से पहली जटिल ऑर्थोपेडिक शल्यक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस उपलब्धि के साथ ही सिम्स में अब गंभीर हड्डी रोग एवं सड़क दुर्घटना से जुड़े जटिल मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो गया है। इससे मरीजों को रायपुर या निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने की मजबूरी समाप्त हो गई है।
नववर्ष के अवसर पर सिम्स को प्राप्त इस आधुनिक C-ARM मशीन का विधिवत शुभारंभ संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति द्वारा पूजा-अर्चना के साथ ऑपरेशन थिएटर में किया गया था। इसके पश्चात मशीन का उपयोग जटिल शल्यक्रियाओं में प्रारंभ हुआ।
उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग सात वर्षों से सिम्स में C-ARM मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण हर वर्ष 100 से 150 गंभीर ऑर्थोपेडिक एवं ट्रॉमा मरीजों को रायपुर अथवा निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था। अब मशीन की उपलब्धता से यह समस्या दूर हो गई है।
इसी क्रम में C-ARM मशीन से पहली जटिल सर्जरी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक मरीज पर की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार खेदु दास (40 वर्ष), निवासी देवरीडीह, जिला बिलासपुर, 27 दिसंबर 2025 को मोटरसाइकिल से घर लौटते समय व्यापार विहार स्थित दुर्गा मंदिर के पास एक ऑटो से टकरा गए थे। दुर्घटना में उनके दाहिने पैर की हड्डी बाहर निकल आई थी, जो अत्यंत गंभीर स्थिति थी।
ऑर्थोपेडिक विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल प्राथमिक उपचार किया और हड्डी को सही स्थिति में स्थापित कर बाहर से रॉड लगाकर पैर को फिक्स किया गया, जिससे संक्रमण और अन्य जटिलताओं को रोका जा सका। घाव भरने के बाद 5 जनवरी 2026 को C-ARM मशीन की सहायता से मरीज के पैर में टीबिया नेलिंग की जटिल शल्यक्रिया सफलतापूर्वक की गई। C-ARM तकनीक से सर्जरी के दौरान हड्डी की सटीक स्थिति प्रत्यक्ष रूप से देखी जा सकी, जिससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध हुआ।
इस सर्जरी में ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉ. ए. आर. बैन, डॉ. संजय घिल्ले, डॉ. अविनाश अग्रवाल एवं डॉ. प्रवीण द्विवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं एनेस्थीसिया विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. भावना राय जाजा एवं डॉ. बर्मन द्वारा कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन और निरंतर जीवनरक्षक निगरानी सुनिश्चित की गई।
इस अवसर पर सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि नववर्ष पर प्राप्त C-ARM मशीन संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे अब जटिल हड्डी रोग और सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों का उच्चस्तरीय उपचार सिम्स में ही संभव हो पाया है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि C-ARM मशीन के आने से ट्रॉमा और ऑर्थोपेडिक सर्जरी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ी है।
ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बैन ने बताया कि नई मशीन से टीबिया नेलिंग जैसी जटिल सर्जरी अब अधिक सटीकता और आत्मविश्वास के साथ की जा रही हैं, जिससे मरीजों की रिकवरी तेज हो रही है।
चिकित्सकों के अनुसार मरीज की स्थिति फिलहाल स्थिर और संतोषजनक है तथा वह चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
सिम्स में स्थापित यह C-ARM मशीन अब क्षेत्र के गंभीर हड्डी रोगियों और सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए नई उम्मीद और भरोसे का केंद्र बनती जा रही है।
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