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August 28, 2026 11:49 am

कानाफूसी

ये चुनावी आंच किस-किसको झुलसाएगी

कांग्रेस का फ्रंटल आर्गेनाइजेशन कहे जाने वाले यूथ कांग्रेस के दिग्गज फिलहाल चुनावी मोड पर हैं। यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चुनावी रणनीति तैयारी हो रही है। उम्मीदवार एक से दूसरे शहर घुम-घुमकर समर्थन जुटा रहे हैं। चुनावी कैंपेनिंग की खास बात ये, यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में सीनियर लीडर्स कूद पड़े हैं। या यूं कहें कि सीनियर लीडर्स ही चुनावी बिसात बिछा रहे हैं और इनके बीच ही शह और मात का खेल चल रहा है। उम्मीदवार और समर्थक तो प्यादे हैं। राजा के इशारे पर वजीर दांव खेल रहे हैं और प्यादे को इसी दांवपेंच में आगे पीछे कर रहे हैं। चुनावी बिसात और शह मात के इस खेल में आंच भी आने लगी है और कांग्रेस का एक धड़ा तपन भी महसूस करने लगा है। जैसे-जैसे दिन नजदीक आते जा रहा है, आंच भी उसी अंदाज में आने लगी है। पता नहीं ये आंच किस-किसको झुलसाएगी। एनएसयूआई संगठन में रद्दोबदल और फिर यथास्थिति से यह साफ हो रहा है, इस चुनावी बिसात से कोई बच नहीं सकता।

एक बड़ा सवाल, भाजपा के संगठन महामंत्री को गुस्सा क्यों आया

प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री बीते दिनों प्रदेश व्यापी दौरे पर थे। उत्तर छत्तीसगढ़ के प्रवास के दौरान उनका अनुभव बेहद कड़वा रहा। वह भी सड़क के मामले में। उनका वाहन ही घंटों गड्ढों वाली सड़क पर फंसा रहा। वहां से निकले तो अंबिकापुर आते-आते फिर वही हाल। सर्किट हाउस पहुंचते ही गुस्सा सातवें आसमान पर। आमतौर पर मुस्कराते रहने वाले संगठन महामंत्री का तेवर गरम रहा। उनका यह तेवर देखकर मंत्री से लेकर कार्यकर्ता और पदाधिकार सन्न रह गए। सर्किट हाउस में एक-एक सब की क्लास ले ली। गुस्से का असर भी दिखाई दिया। दूसरे दिन से गड्ढे वाली सड़कों की फिलिंग शुरू हो गई। अब तो पब्लिक भी  कहने लगी है, काश ऐसा ही गुस्सा और भी बदहाली के लिए आए तो अच्छा रहेगा।

भीड़ की ओर इशारा और पूछा, बताओ इनमें कितने ठेकेदार हैं

बात जब संगठन महामंत्री के गुस्से की चल पड़ी है तो इसे थोड़ा और आगे बढ़ा लेते हैं। गुस्सा महामंत्री ने उत्तर छत्तीसगढ़ के नामचीन भाजपाइयों की भीड़ की ओर इशारा करते हुए पूछा, बताओ इतने में कितने ठेकेदार हैं। जवाब सुने बिना ही बोले, अधिकांश तो ठेकेदार बन गए, पर किस काम का। सड़को की गड्ढों को खुद होकर भर लेते। बात जब ठेकेदारों की चल पड़ी है और संगठन महामंत्री ने खुद ही इस राज को खोल दिया है तब यह पता लगाने की जरुरत है, उत्तर छत्तीसगढ़ से लेकर समूचे छत्तीसगढ़ में ऐसे कितने हैं। कितने के पास काम है और कितने काम मिलने की कतार में खड़े हैं। कहीं आधे से अधिक मौसमी तो नहीं। 

क्रेडिट पॉलिटिक्स और दो दिग्गजों के बीच चूहा बिल्ली का खेल

सियासत में श्रेय नहीं लिया या फिर श्रेय के लिए कुछ नहीं किया तो फिर राजनीति ही नहीं की है। क्रेडिट पॉलिटिक्स के मौजूदा दौर में प्रदेश में पिछड़ी जाति के दो दिग्गज नेताओं के बीच गजब का चूहा बिल्ली का खेल चल रहा है। बात-बात पर क्रेडिट लेने की होड़ और उसके बाद प्रचार प्रसार का ना थमने वाला दौर। कहीं स्वागत सत्कार तो कहीं समर्थकों की भीड़ के बीच आत्मुग्धता का सियासी खेल। श्रेय लेने के लिए जिस अंदाज में होड़ मची हुई है, ये दिग्गज और उनके कुछ खास चाटुकार भी यह अच्छी तरह जान  रहे हैं, यही रोग आगे चलकर कहीं भारी ना पड़ जाए। चाटुकारों के बीच असमंजस इस बात को लेकर है, आखिर इनको समझाए कैसे। अति महत्वाकांक्षा और क्रेडिट पॉलिटिक्स के मोह कहीं भारी पड़ गया तब क्या होगा। ये समर्थक और कुछ खास चाटुकार सोच रहे हैं। जाहिर सी बात है, बात जरा भी ऊंच नीच हुआ तो सबसे  पहले रिएक्शन इन्हीं को झेलना पड़ेगा।

अटकलबाजी

भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री ने ऐसा क्यों कहा, जितने लोग यहां मौजूद हैं उनमें आधे से अधिक ठेकेदार हैं। सत्ताधारी दल के दिग्गज को अब पौने तीन साल बाद इस बात का एहसास क्यों और किसलिए होने लगा है। 

छोटी-छोटी बात पर जिस तरह श्रेय लेने की राजनीति चल रही है, उसका अंजाम आगे चलकर क्या होगा। दिल्ली की नजर तीरछी हो गई तब क्या होगा।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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