2028 तक नई पर्यटन पहचान बनाने का लक्ष्य, चित्रकोट-सिरपुर समेत प्रमुख स्थलों के विकास पर जोर
CBN36 रायपुर, 25 अगस्त 2026। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभागीय उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और जनजातीय विरासत को देश-दुनिया के सामने नई पहचान दिलाना है।
मंत्री ने बताया कि चित्रकोट, तीरथगढ़, बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे आस्था केंद्रों को पर्यटन विकास की व्यापक योजना से जोड़ा जा रहा है।
पर्यटन में निजी निवेश को बढ़ावा
पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर के विकास की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये है।
61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी दर्शन
श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए गए हैं। सरकार धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने पर जोर दे रही है।
चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी
मंत्री ने कहा कि चित्रकोट को केवल जलप्रपात तक सीमित न रखते हुए विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। सिरपुर के समग्र विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम जारी है।
भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ रुपये स्वीकृत
धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर के विकास हेतु भारत सरकार ने 145 करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।
होमस्टे से स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन का लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचाने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है।
2028 तक पर्यटन की नई पहचान का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया में स्थापित करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग
छत्तीसगढ़ को इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म एवं ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच और विदेशी इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं।
कलाकारों और संस्कृति संरक्षण पर विशेष जोर
संस्कृति क्षेत्र में कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता दी गई है। मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को करीब 19 लाख 8 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई।
वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों की मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दी गई है।
बस्तर पंडुम और लोककलाओं को संरक्षण
प्रदेश के विभिन्न जिलों में 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव और समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए ‘आदि पर्व’ पंचांग तैयार किया जा रहा है। बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के लिए ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन भी किया जा रहा है।
‘पावस प्रसंग’, ‘रंगतरंग’, ‘रंगपरब’ और ‘लोकरंग पर्व’ जैसे आयोजनों के माध्यम से पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत सहित विभिन्न लोकविधाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है।
संस्कृति का डिजिटल आर्काइव तैयार
छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए विस्तृत डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है। वहीं सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं को भी आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है।
सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में पहल
सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है। प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर भी काम किया जा रहा है।
संग्रहालय और पुरखौती मुक्तांगन का होगा उन्नयन
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर में नई ‘रियासत गैलरी’ की स्थापना तथा मौजूदा गैलरियों के उन्नयन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।
12 लाख पृष्ठों का डिजिटल अभिलेखीकरण
छत्तीसगढ़ से संबंधित करीब 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन्हें वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग और मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।
2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण
पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया गया है। रायपुर जिले के आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में हुए उत्खनन में करीब 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिले हैं। यहां प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से कलचुरी काल तक के अवशेष तथा विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना है। सरकार दीर्घकालिक योजना के साथ प्रदेश को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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