CBN36 बिलासपुर। जन्म के साथ ही दोनों नासिका मार्ग बंद होने से सांस के लिए जूझ रहे नवजात को श्री शिशु भवन हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने उपचार के बाद नई जिंदगी दी। Bilateral Choanal Atresia नाम की दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्चे को करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इसके बाद जटिल सर्जरी और लगभग 30 दिनों की सतत चिकित्सा व विशेष नर्सिंग देखभाल के बाद बच्चा स्वस्थ होकर माता-पिता के साथ घर लौट गया।
लोरमी निवासी गौसिया परवीन के बच्चे का जन्म तीन जुलाई को हुआ था। जन्म के तत्काल बाद उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। दोनों नासिका मार्ग जन्म से ही बंद होने के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई। परिजन उसी दिन बच्चे को उपचार के लिए बिलासपुर के श्री शिशु भवन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया

अस्पताल पहुंचने पर डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। सबसे पहले बच्चे की सांस और ऑक्सीजन की स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। हालत गंभीर होने के कारण उसे करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इस दौरान डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए रही।
दोनों नासिका मार्ग थे जन्म से बंद
डॉ. श्रीकांत गिरी के अनुसार Bilateral Choanal Atresia नवजात शिशुओं में होने वाली दुर्लभ जन्मजात बीमारी है। इसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं। नवजात शुरुआती अवस्था में मुख्य रूप से नाक से सांस लेते हैं। ऐसे में दोनों रास्ते बंद होने पर बच्चे को गंभीर श्वसन संकट और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। कई मामलों में शरीर नीला पड़ने जैसी स्थिति भी बन सकती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा हो सकती है।
उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में सबसे पहले बच्चे की सांस और ऑक्सीजन की स्थिति को स्थिर करना जरूरी होता है। आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है। स्थिति स्थिर होने के बाद बंद नासिका मार्ग को खोलने के लिए सर्जिकल उपचार किया जाता है।
हालत स्थिर होने के बाद की गई जटिल सर्जरी
करीब एक सप्ताह के वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद बच्चे की स्थिति आवश्यक रूप से स्थिर हुई। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूरी तैयारी के साथ जटिल सर्जिकल उपचार किया। सर्जरी के बाद भी बच्चे को लगातार चिकित्सकीय निगरानी और विशेष नर्सिंग देखभाल में रखा गया।
करीब 30 दिनों की सतत चिकित्सा, निगरानी और विशेष देखभाल के बाद बच्चे ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। आठ अगस्त को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों और नर्सिंग टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस जटिल उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी और डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधक नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग और सपोर्ट स्टाफ ने भी बच्चे की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, बच्चे को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचने से लेकर उसकी स्थिति स्थिर करने, सर्जिकल उपचार और बाद की देखभाल तक सभी चरणों में टीम ने समन्वय के साथ काम किया।
बच्चे को स्वस्थ देखकर माता-पिता की आंखों में आए आंसू
करीब एक महीने के उपचार के बाद जब बच्चे को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी मिली तो माता-पिता भावुक हो गए। बच्चे को स्वस्थ देखकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार ने उपचार करने वाले डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल की पूरी टीम का आभार जताया। समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा, सतत निगरानी और टीमवर्क के चलते गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे नवजात की जिंदगी बचाई जा सकी।
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