बिलासपुर। भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। भगवान जगन्नाथ गर्भगृह से बाहर निकलकर बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर विराजमान हुए तथा नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए। देर रात भगवान की रथयात्रा ओड़िया स्कूल स्थित मौसी मां के घर पहुंची, जहां वे परंपरा के अनुसार कुछ दिनों तक विराजमान रहेंगे।

रेलवे क्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से सुबह विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। सबसे पहले रथ में भगवान का गरुड़ स्तंभ और सुदर्शन चक्र स्थापित किया गया। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को विशेष श्रृंगार के साथ रथ पर विराजित किया गया। इस दौरान भगवान के दर्शन और स्पर्श कर आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।

रथयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। यात्रा मार्ग पर जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। ‘छेरा पहरा’ की पारंपरिक विधि रमेश चंद्र महापात्रा ने संपन्न कराई।

मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। भगवान जगन्नाथ ने नगर भ्रमण के दौरान भक्तों को दर्शन देकर सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान किया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों के बीच आकर उन्हें दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। श्रद्धालुओं ने इसे सौभाग्य का अवसर माना। यात्रा के दौरान हुई बारिश को भी भक्तों ने भगवान की विशेष कृपा का प्रतीक मानते हुए उत्साह के साथ आयोजन में भागीदारी निभाई। देर रात भगवान का रथ ओड़िया स्कूल स्थित मौसी मां के घर पहुंचा, जहां उनके स्वागत में आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न होंगे।
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