छत्तीसगढ़,रायपुर।तपती धूप सिर पर थी, कलेक्ट्रेट चौक पर जनसैलाब उमड़ा हुआ था शोर हलचल और उत्साह के बीच अचानक एक मासूम की सिसकियाँ उस भीड़ में अलग ही सुनाई दे रही थीं।
इसी बीच डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान नन्हा अर्णव अपने परिजनों से बिछड़ गया। घबराया हुआ, आंखों में आंसू लिए वह हर चेहरे में अपने मां-बाप को तलाश रहा था।

तभी ड्यूटी पर तैनात नव आरक्षक कीर्ति नेताम की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति को समझा बिना एक पल गंवाए बच्चे को अपनी गोद में उठाया। ममता भरे स्पर्श और शांत शब्दों ने धीरे-धीरे अर्णव की रुलाई थाम दी।
इसके बाद कीर्ति नेताम ने अपने साथियों के सहयोग से बच्चे के परिजनों की खोज शुरू की। भीड़ के बीच लगातार प्रयास रंग लाया कुछ ही समय में अर्णव अपने माता-पिता की बाहों में था।

उस पल का दृश्य भावुक कर देने वाला था बच्चे के चेहरे पर लौटती मुस्कान, और माता-पिता की आंखों में छलकती राहत मानो भीड़ के बीच इंसानियत ने जीत हासिल कर ली हो।
यह घटना आरक्षक की सिर्फ एक ड्यूटी नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण है जो यह बताती है कि वर्दी के पीछे एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है।
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