बिलासपुर। कुम्हार का परम्परागत काम करने वाले याचिकाकर्ता को नायब तहसीलदार ने अपने एक आदेश से रोक दिया। आजीविका रोके जाने के मामले में सुनवाई कर हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार के आदेश पर स्थगन प्रदान किया है। साथ ही कलेक्टर दुर्ग समेत प्रतिवादी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।
याचिका में कहा गया कि कार्यवाही विधि विरुद्ध है क्योंकि याचिकाकर्ता को बिना सुनवाई का मौका दिए सीधा आदेश जारी कर दिया गया। इससे उसके परिवार के सामने आजिविका का संकट गहरा गया है। याचिका में कहा गया कि 22 अगस्त 2015 को माटीकला बोर्ड अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष मांग करने पर यह आदेश दिया गया कि कुम्हार जाति द्वारा पारिवारिक पेशा इंट मिट्टी के बर्तन बनाये जाने के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की दस लाख तक रायल्टी से मुक्त रखा गया है। सार्वजानिक स्थान से सभी दिशाओं से 50 मीटर तक निर्माण नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद उच्च न्यायलय ने कलेक्टर दुर्ग ,तहसीलदार, पाटन खनिज विभाग, उप सरपंच एवं अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब माँगा है। पाटन तहसील के नायब तहसीलदार के स्थगन पर याचिकाकर्ता के पक्ष में रोक लगा दी है।
प्रधान संपादक


