बिलासपुर। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ( सीजीएमएससी) की मनमानी कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए एक लाख की एक्सेम्प्लरी कास्ट लगाने का आदेश दिया है। इस राशि का चेक याचिकाकर्ता के खाते में जमा किया जाएगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट रूप से यह पाया कि सीजीएमएससी ने स्पष्टीकरण से जुड़ा अहम ई-मेल गलत और असंबंधित ई-मेल आईडी पर भेजकर याचिकाकर्ता को अवैध रूप से अयोग्य ठहराया था। याचिकाकर्ता नटवर लाल अग्रवाल रायगढ़ द्वारा सरकार के लिए अधिक लाभकारी न्यूनतम दर प्रस्तुत किए जाने के बावजूद उनकी वित्तीय बोली खोली ही नहीं गई। एडवोकेट आशुतोष मिश्रा के माध्यम से पेश याचिका के अनुसार पत्थलगाँव जशपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोतबा का भवन व अस्पताल निर्माण किया जाना था। इस 4 करोड़ के टेंडर के लिए याचिकाकर्ता ने सबसे कम बोली लगाईं थी। इसके बाद भी उन्हें यह टेंडर नहीं दिया गया। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि, जिन दस्तावेजों के आधार पर रायगढ़ स्थित 100 बिस्तर अस्पताल का उन्हें टेंडर प्रदान किया जा चुका है, उन्हीं दस्तावेजों को कोतबा में सीजीएमएससी द्वारा दरकिनार कर दिया गया। साथ ही अन्य निविदाकर्ता हितेन सूर्यवानी को यह टेंडर दे दिया गया । सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि, प्रतिवादी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड का यह आचरण संविधान के अनुच्छेद 14 का सीधा उल्लंघन है और सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत को कुचलता है। कोर्ट ने हालांकि इस अस्पताल परियोजना को जनहित में जारी रखा लेकिन सीजीएमएससी की मनमानी स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 1 लाख का मुआवजा देने का आदेश पारित किया है।
प्रधान संपादक


