बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने तथा उनके विकास और संवर्धन को गति देने के उद्देश्य से राज्य शासन के उद्योग विभाग द्वारा राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के माध्यम से गठित इस समिति में उद्योग जगत और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि उद्योग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जमीनी स्तर पर उद्यमियों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।

यह समिति सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल के नेतृत्व में कार्य करेगी। समिति में प्रबंध संचालक श्विश्वेश कुमार, उद्योग संचालक प्रभात मलिक, कार्यपालन संचालक संतोष भगत तथा मुख्य अभियंता हेमंत कुटारे को शासकीय प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही उद्योग जगत से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान दिया गया है। छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरीश केडिया को समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। उनके मनोनयन को प्रदेश के उद्योग संगठनों ने उद्योग हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उद्योग संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि श्री केडिया का अनुभव और जमीनी समझ सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की समस्याओं के समाधान में सहायक सिद्ध होगी।
श्री केडिया के मनोनयन पर उद्योग जगत में प्रसन्नता का माहौल है। इस अवसर पर जिला उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष अरुण अग्रवाल, ब्रजमोहन अग्रवाल, जितेंद्र गांधी, अनिल सुलुजा, अनिल अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, चंद्रकांत भट्ट, सुनील मरदा, अरविंद गर्ग सहित कई वरिष्ठ उद्योगपतियों ने बधाई दी। इसके अलावा जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष सतीश शाह, महासचिव शरद सक्सेना, कोषाध्यक्ष राम सुभाष, उपाध्यक्ष नवीन अग्रवाल, शिव कुमार अग्रवाल, एस.एस. राज, पी.एस. भाटिया, सुभाष अग्रवाल, महेश सुलतानिया, सुनील सुलतानिया, सचिव अशोक अग्रवाल, योगेश गुप्ता, नरेश सिंघानिया, के.सी. भारद्वाज, धर्मेंद्र पटेल, मनीष कश्यप, विष्णु मुरारका, दिनेश शर्मा, शंकर मंचंदा, पुरूषोत्तम सिदार, किशोर पटेल, प्रकाश त्रिवेदी और मुकेश लालचंदानी ने भी हर्ष व्यक्त किया।
अनुभव का उद्योगों को मिलेगा फायदा
उद्योग संघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि नई समिति के गठन से प्रदेश में सूक्ष्म और लघु उद्योगों को नई दिशा मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। समिति के माध्यम से उद्योगों से जुड़ी नीतिगत बाधाओं को दूर कर विकास को गति देने का प्रयास किया जाएगा।
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