बिलासपुर। केंदा से कारीआम को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इन दिनों पूरी तरह बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं और डामर की परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। इसके चलते इस मार्ग पर सफर करना ग्रामीणों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। रोजाना छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहीं रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं। लोक निर्माण विभाग ने सड़क मरम्मत का काम शुरू करने और माह के अंत तक मार्ग को चलने योग्य बनाने का दावा किया है।

केंदा और कारीआम के बीच घाटी क्षेत्र से गुजरने वाली यह सड़क लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही है। सड़क की ऊपरी सतह पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिससे वाहनों के पहिए पत्थरों और मलबे में फंस रहे हैं। लालापुर निवासी शैलेन्द्र सिंह राजपूत सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर चलना जान हथेली पर रखने जैसा हो गया है। दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं, वहीं भारी वाहनों के पलटने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि खराब सड़क के कारण आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं का पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। लोक निर्माण विभाग (एनएच डिवीजन) की ओर से बताया गया है कि सड़क सुधार का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्सों से पुराना डामर हटाकर वॉटर बाउंड मैकाडम (डब्ल्यूबीएम) तकनीक से मरम्मत और समतलीकरण का काम किया जा रहा है। पैच रिपेयरिंग के जरिए बड़े गड्ढों को भरा जा रहा है ताकि यातायात को अस्थायी राहत मिल सके। विभाग का दावा है कि इस माह के अंत तक सड़क को सुगम बना दिया जाएगा। इस मार्ग की खराब हालत का असर आसपास के अन्य रास्तों पर भी पड़ रहा है। केंदा–कारीआम मार्ग जर्जर होने के कारण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और अमरकंटक की ओर जाने वाले अधिकांश वाहन अब बेलगहना-कोंचरा मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। इससे उस मार्ग पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया है और वहां भी सड़क टूटने लगी है। बढ़ते यातायात के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। उधर, क्षेत्र में लंबे समय से प्रस्तावित एलीवेटेड हाईवे परियोजना को भी इस समस्या का स्थायी समाधान माना जा रहा है। एनएच-45 की आरकेकेएम सड़क पर तीन चरणों में निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती 219 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला एलीवेटेड हाईवे है। इसके तैयार होने से घाटी के 10 खतरनाक मोड़ समाप्त होंगे और केंदा-कारीआम के बीच आवागमन सुरक्षित और सुगम हो जाएगा। लोक निर्माण विभाग एनएच डिवीजन के अभियंता रविन्द्र कुमार खाम्बरा ने बताया कि फिलहाल टूटे हिस्सों पर डब्ल्यूबीएम का काम किया जा रहा है और कोशिश है कि इस महीने के अंत तक सड़क पूरी तरह चलने लायक हो जाए, ताकि राहगीरों को राहत मिल सके।
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