प्रदेश में लगातार चौथी बड़ी ट्रैप कार्रवाई,आवास पर ली रिश्वत, वहीं दबोचा गया आरोपी
प्रशासनिक स्तर पर की गई यह कार्रवाई महज औपचारिक साबित हुई। मस्तूरी में पदस्थापना के बाद आरोपी ने शासकीय उचित मूल्य दुकान के आबंटन से जुड़े प्रकरण में स्व सहायता समूह से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि पूर्व शिकायतों के बाद भी निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही।

रायपुर छत्तीसगढ़ ।प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार और प्रशासन के दावों के बीच बिलासपुर से सामने आया यह मामला व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। फूड इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के प्रकरण में यह तथ्य उजागर हुआ है कि आरोपी अधिकारी के विरुद्ध पूर्व में जन शिकायत दर्ज होने और प्रशासनिक कार्रवाई होने के बावजूद उसे दोबारा फील्ड पोस्टिंग दे दी गई, जिसका नतीजा एक और भ्रष्टाचार के रूप में सामने आया।
जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ महीने पूर्व पब्लिक शिकायत पर कलेक्टर बिलासपुर ने आरोपी फूड इंस्पेक्टर श्याम वस्त्रकार को खाद्य विभाग के जिला मुख्यालय में अटैच किया था। यह कदम शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया था। इसके बावजूद करीब एक माह पूर्व उसे पुनः ट्रांसफर कर मस्तूरी में पदस्थ कर दिया गया, जहां उसने कार्यभार ग्रहण किया।
निगरानी कमजोर, अवसर बना भ्रष्टाचार का रास्ता
एसीबी की ट्रैप कार्रवाई से खुला मामला
ग्राम विद्याडीह निवासी महेंद्र पटेल की शिकायत पर एसीबी ने मामले का सत्यापन किया, जो सही पाया गया। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को एसीबी की बिलासपुर इकाई ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके महावीर सिटी, बिलासपुर स्थित आवास पर 90 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की पूरी राशि बरामद की गई है।
कानूनी कार्रवाई, अब उठेंगे जवाबदेही के सवाल
एसीबी ने आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। आरोपी के आवास पर सर्च की कार्रवाई भी जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि प्रारंभिक शिकायत के बाद ही सख्त और निर्णायक कदम उठाए जाते, तो क्या यह ट्रैप कार्रवाई रोकी जा सकती थी।
लगातार चौथी ट्रैप कार्रवाई, पर सिस्टम पर सवाल बरकरार
गौरतलब है कि एसीबी बिलासपुर द्वारा हाल के दिनों में तहसीलदार, पटवारी, एसडीएम कार्यालय के बाबू और विद्युत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समेत अन्य मामलों में भी कार्रवाई की जा चुकी है। वर्ष 2026 में यह एसीबी बिलासपुर की लगातार चौथी ट्रैप कार्रवाई है।हालांकि एसीबी की सक्रियता सराहनीय मानी जा रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कठोर कदम न उठाए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
शिकायत पर हुई कार्रवाई

डीएसपी एसीबी बिलासपुर अजितेश सिंह ने बताया कि ग्राम विद्याडीह, थाना मस्तूरी निवासी महेंद्र पटेल ने 3 फरवरी को एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि वर्तमान में ग्राम की उचित मूल्य दुकान पंचायत द्वारा संचालित है, जिसे शैल स्व सहायता समूह को आबंटित करने के लिए आवेदन एसडीएम कार्यालय में पूर्व से लंबित है।फूड इंस्पेक्टर द्वारा जांच रिपोर्ट अनुकूल प्रस्तुत करने और आबंटन आदेश जारी कराने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की जा रही थी। शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
जनता से एसीबी की अपील
एसीबी ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी लोकसेवक द्वारा रिश्वत की मांग की स्थिति में तत्काल सूचना दें। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
प्रधान संपादक


