कमिश्नर सिस्टम, कुर्सी दौड़ शुरू
राज्य सरकार ने 23 जनवरी से राजधानी रायपुर में कमिश्नर प्रणाली को लागू करने का ऐलान कर दिया है। सरकारी घोषणा के बाद क्या कुछ होना चाहिए,इसे लेकर आला अफसरों के बीच मंथन का दौर शुरू हो गया है। जाहिर सी बात है सीएस और डीजीपी दोनों इन्वाल्व हो गए हैं। सरकार के मंथन के बीच सीनियर आईपीएस अफसरों के बीच कुर्सी दौड़ शुरू हो गई है। कहते हैं कुर्सी भाग्य और भरोसे के अलावा समीकरण के हिसाब से तय होती है। मैनेजमेंट भी अच्छा खास प्रभाव डालता है। कमिश्नरी के दौर में बड़ी कुर्सी किस आईपीएस अफसर को हासिल होती है, ये भी देखने वाली बात होगी। नामचीन आईपीएस अफसरों के नामों की चर्चा भी शुरू हो गई है। न्यायधानी से लेकर राजधानी में पदस्थ अफसरों के नाम चल रहे हैं। ऐसा भी कह सकते हैं, ना-ना कहते-कहते, ये दौड़ में शामिल हो ही गए हैं।
राजधानी की ओर लगी नजर
राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम की चर्चा के बीच इस बात की चर्चा भी जरुरी जान पड़ रही है, 23 जनवरी को जब रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होगा उसके ठीक पहले कुछ सीनियर आईपीएस की तबादला सूची भी जारी होगी। कुछ सीनियर आईपीएस का तबादला ड्यू है। कमिश्नर सिस्टम के साथ ही ट्रांसफर आर्डर भी जारी होगा। सीनियर आईपीएस अफसरों की टीम राजधानी में नजर आएगी। चर्चा के बीच इस बात की भी अटकलें लगाई जा रही है कि न्यायधानी और राजधानी के अलावा प्रदेश के बड़े जिलों में सीनियर आईपीएस आएंगे और उसी अंदाज में सीनियर्स राजधानी में शिफ्ट होंगे। कमिश्नर सिस्टम में न्यायधानी के सीनियर आईपीएस की चर्चा हो रही है तो राजधानी में कप्तानी को लेकर भी न्यायधानी भारी पड़ रहा है। बस कुछ दिनों का इंतजार है। आगे-आगे देखते जाइए होता है क्या।
निगम में झगड़ा किस बात का, प्रोटोकॉल तो बहाना है
बिलासपुर नगर निगम में दो सीनियर पार्षदों के बीच तकरार की चर्चा अब सार्वजनिक होने लगी है। बात सिविल लाइन बंगले तक जा पहुंची है। मेयर को हाजिरी लगानी पड़ी सो अलग। हाजिरी के बीच इस बबात की भी चर्चा हो रही है कि एमआईसी की मीटिंग में कुछ मेंबर्स प्रेशर पॉलिटिक्स खेल रहे हैं। ठेके और कमीशन का खेल भीतर ही भीतर शुरू करने प्रेशर बनाने लगे हैं। भैया के कान में भी यह बात पहुंच गई है। निगम की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले झगड़े को लेकर अचरज में नहीं है। इसे सामान्य प्रक्रिया मानकर चल रहे हैं। कहने वाले तो यहां तक बोल रहे हैं कि निगम की राजनीति में यह सब चलता है। पुराने महापौर का कार्यकाल सबको याद है। जब अपने ही विपक्ष की भूमिका में नजर आने लगे थे। प्रोटोकॉल तो बहाना है। एक दूसरे को नीचा दिखाना ही टारगेट था। जिसको जब मौका मिला, नियम कानून कायदे को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर लिया।
दमदार कप्तानी, काम कर गई समझाइश
नए वर्ष की शुरुआत हो चुकी है। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर याने 31 दिसंबर की रात शहर में धमाल ही तो होता था। सड़कों पर देर रात जुलूस जैसा माहौल, जो सुबह तक चलते रहता था। सड़कों पर आतिशबाजी ऐसी मानो, घर का आंगन हो। केक भी उसी अंदाज में काटे जाते थे। होटलों में धमाल के बीच विवाद आम बात हो गई थी। इस बार ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ना हुड़दंग और ना ही शोरगुल। शहर से लेकर जिले में तगड़ी पुलिसिंग तो थी ही, कप्तान की समझाइश का असर ही कहें कि इस बार सब-कुछ ठीक रहा। दमदार कप्तान की कप्तानी भी इसी अंदाज में सामने आई। आम शहरी व ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और चैन की नींद भी।
अटकलबाजी
निगम की पॉलिटिक्स में जो कुछ घट रहा है, क्या आने वाले दिनों में एमआईसी मेंबर्स में बदलाव दिखाई देगा। नए चेहरे नजर आएंगे या फिर सीनियर्स के बीच ही रिप्लेसमेंट होगा।
युवा महोत्सव और कवि सम्मेलन के दौर में कुर्सी को लेकर जिस तरह विवाद की स्थिति बनी, शहर विधायक की नाराजगी जिस अंदाज में सामने आई, अब आगे क्या होगा। कौन अफसर निपटने वाले हैं।
प्रधान संपादक

