बालोद छत्तीसगढ़ ।जिले के डोंडीलोहारा विकासखंड स्थित खरखरा जलाशय में सर्दियों के आगमन के साथ ही विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। यूरोप, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न देशों से हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, लेसर व्हिस्लिंग डक सहित कई दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी यहां पहुंचे हैं। जलाशय और आसपास का क्षेत्र इन दिनों पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है।

हर वर्ष उत्तरी गोलार्ध में कड़ाके की ठंड शुरू होते ही भारत प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बन जाता है। पर्याप्त भोजन, अनुकूल जलवायु और अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण के कारण ये पक्षी यहां सर्दियां बिताते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवासन केवल मौसमी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण कड़ी है।
डोंडीलोहारा विकासखंड में पदस्थ सहकारिता विस्तार अधिकारी एवं पक्षी प्रेमी सोमेंद्र कुमार साहू ने हाल ही में खरखरा जलाशय में पक्षी अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि विकासखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम घोरदा के पास स्थित इस जलाशय में दो घंटे के अवलोकन के दौरान 25 से अधिक प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए। इनमें रेड क्रेस्टेड पोचार्ड और लेसर व्हिस्लिंग डक की संख्या 500 से अधिक पाई गई।

अवलोकन के दौरान स्थानीय निवासी बलवीर ठाकुर भी उनके साथ मौजूद थे। सोमेंद्र साहू के अनुसार जलाशय क्षेत्र में अल्ट्रामरीन फ्लाईकैचर, ब्लैक रेडस्टार्ट, व्हाइट-आई बज़ार्ड, लाफिंग डव, पर्पल हेरॉन, प्लेन प्रिनिया, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, सनबर्ड और रेड वेंटेड बुलबुल जैसी प्रजातियां भी देखी गईं। उन्होंने बताया कि खरखरा जलाशय का तट प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत अनुकूल है। यहां बार-हेडेड गूज, नॉर्थर्न पिनटेल, ब्लूथ्रोट, साइबेरियन पक्षी और पेंटेड स्टॉर्क जैसे हिमालय पार करने वाले पक्षी भी देखे जाते हैं, जिनमें से कुछ प्रजातियां यहां प्रजनन भी करती हैं।
सोमेंद्र साहू ने हाल ही में रूसे जलाशय में दुर्लभ कॉमन क्रेन की तस्वीर भी ली है, जो छत्तीसगढ़ में बहुत कम स्थानों पर रिकॉर्ड की गई है।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के आगमन के साथ पक्षी तस्करों और स्थानीय शिकारियों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में वन विभाग को सतर्कता बरतते हुए कड़ी निगरानी और कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इन दुर्लभ मेहमानों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर 2025 को बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है, जो राज्य में आर्द्रभूमि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खरखरा जैसे जलाशय भी भविष्य में इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के योग्य बन सकते हैं।
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