वर्धा।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा तथा श्री हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल, अमरावती द्वारा संचालित डिग्री कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, अमरावती के बीच शैक्षणिक एवं अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण एवं खेल विज्ञान के क्षेत्र में परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
समझौता ज्ञापन पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की विशेष उपस्थिति में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री कादर नवाज खान ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिकेत आंबेकर, सहायक कुलसचिव राजेश अरोड़ा तथा विश्वविद्यालय के शिष्टाचार अधिकारी राजेश कुमार यादव उपस्थित थे। वहीं डिग्री कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, अमरावती की ओर से प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास देशपांडे ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उनके साथ हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल की सचिव डॉ. माधुरी चेंडके तथा सहायक प्राध्यापक एवं अनुबंध समन्वयक डॉ. विजय पांडे भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि यह समझौता दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसर सृजित करेगा। उन्होंने बताया कि शारीरिक शिक्षा, खेल विज्ञान, योग, स्वास्थ्य एवं समग्र व्यक्तित्व विकास के क्षेत्रों में संयुक्त कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार, शोध परियोजनाएं तथा प्रशिक्षण गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी, जिससे विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा।
प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास देशपांडे ने इस सहयोग को दोनों संस्थानों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के साथ यह समझौता शैक्षणिक गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि संयुक्त प्रयासों से शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में सहायता मिलेगी।
समझौता ज्ञापन के तहत शिक्षक एवं विद्यार्थी आदान-प्रदान, संयुक्त शोध प्रकाशन, पाठ्यक्रम विकास, खेल एवं शारीरिक शिक्षा से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम, योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां तथा सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इस सहयोग को दीर्घकालिक और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए निरंतर संवाद एवं समन्वय पर जोर दिया।
यह समझौता शैक्षणिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे दोनों संस्थानों की अकादमिक पहचान के साथ-साथ सामाजिक दायित्व को भी नई मजबूती मिलेगी।
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