कुर्सी की लड़ाई और गुटबाजी
दो साल की भाजपा सरकार में कुर्सी की लड़ाई और गुटीय राजनीति अब खुलकर सामने आने लगी है। ना-ना करते आखिर वह घड़ी ही गई जब बड़ों की भीतर ही भीतर चल रही शीतयुद्ध अब खुलकर सामने आने लगी है। युवा महोत्सव के उपलक्ष्य में बिलासपुर में आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान जो कुछ देखने को मिला वह कम से कम भाजपा के दिग्गज नेताओं से उम्मींद नहीं की जा सकती। मंच पर कुर्सी को लेकर दिग्गजों के बीच जैसे मनमुटाव उभरकर सामने आया, कार्यकर्ताओं के लिए असहज करने वाली बात ही रही। कुर्सी लड़ाई में अब किसकी बली चढ़ेगी,यह तो राम जाने, पर इतना तो तय है कि आने वाला समय कुछ अच्छा नहीं दिखाई नहीं दे रहा है। पता नहीं बड़ों की लड़ाई में कौन-कौन निपट जाए। कहते हैं ना गेहूं के साथ तो घुन को पीसना ही है। वही हाल बिलासपुर में भी होने वाला है।
अटैचमेंट के खेल पर लगा पूर्ण विराम
स्कूल शिक्षा विभाग में अटैचमेंट के खेल पर अब मंत्री ने पूर्ण विराम लगा दिया है। अटैचमेंट की आड़ में ना जोन कितनों ने गंगा स्नान कर लिया है। अब इस खेल को स्टाप कर दिया गया है। विभाग से आए निर्देश में साफ लिखा है दो दिन के भीतर कंप्लायंस रिपोर्ट दें। मतलब यही कि दो दिनों के भीतर जहां भी अटैचमेंट का खेल हुआ है उसे खत्म करना है और टीचर को सीधे वहीं भेजना है जहां से वह अटैच होने के लिए आया था। लेन-देन का हिसाब मत लगाइए। जो लेना और देना था वह तो हो ही गया है। यह भी हिसाब मत लगाइए कि कौन फायदे में रहा और कौन घाटे में। मूल संस्था में वापस जाने वालों की संख्या इतनी कि आप उंगलियों में नहीं गिन पाएंगे।
सौम्या के बाद अब किसकी बारी
एसीबी ने सौम्या चौरसिया को एक बार अरेस्ट कर लिया है। शराब और कोल लेव्ही घोटाले में गवाहों की गवाही के बाद सौम्या को समंस जारी किया, पूछताछ हुई और दूसरी मर्तबे अरेस्ट कर लिया गया। जिन आईएएस अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली है, राज्य सेवा संवर्ग की अफसर सौम्या को भी सुप्रीम कोर्ट से कंडिशनल बेल मिली थी। छत्तीसगढ़ से बाहर रह रही थी। बेल वाले आईएएस अफसर भी छत्तीसगढ़ से बाहर ही हैं। सौम्या के दूसरी मर्तबे अरेस्ट होने के बाद एक बार फिर सियासत में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि सौम्या के बाद किस अफसर को बुलावा जाएगा और दूसरी मर्तबे गिरफ्तारी होगी।
बेलतरा में दो पावर हीटर, कार्यकर्ताओं की बल्ले-बल्ले
राज्य सरकार ने बेलतरा के पूर्व विधायक रजनीश सिंह को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर का अध्यक्ष बना दिया है। उपाध्यक्ष के पद पर जांजगीर चांपा की महिला नेत्री पर भरोसा जताया है। रजनीश सिंह के अध्यक्ष बनने का सियासी मायने क्या है। चलिए पहले बैंक के कार्यक्षेत्र पर नजर डालते हैं। बिलासपुर, मुंगेली,गौरेला पेंड्रा मरवाही और कोरबा जिला। चार जिलों में सीधेतौर पर सियासी दखलंदाजी। किसानों के बीच सीधा संपर्क और कामकाज में हस्तक्षेप। राजनीति में दावेदारी को तो छोड़ ही दीजिए। जब चार जिले में कामकाज संभाल रहे हैं किसाानों से सीधे ताल्लुक रख ही रहे हैं तो दावेदारी तो ऐसे ही बनती है। इन सब बातों कोा छोड़ दीजिए। बेलतरा चलते हैं। बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक होने के नाते सबसे ज्यादा दखलंदाजी तो यही नजर आएगी। कार्यकर्ताओं के तो बल्ले-बल्ले हो ही रहा है। आगे आगे देखते हैं होता क्या है। बहरहाल राज्य सरकार ने पूर्व एमएलए को दमदार कुर्सी दे दिया है।
अटकलबाजी
कुर्सी लड़ाई में जिले के किस आला अफसर की ओर उंगली उठ रही है। विधायक व पूर्व मंत्री की नाराजगी का असर क्या होगा। जिले के कौन-कौन अफसर निपटेंगे। सबसे पहले कौन।
रजनीश सिंह की सियासत में दमदार तरीके से वापसी के पीछे का राजनीतिक समीकरण क्या है। कौन सबसे ज्यादा टेंशन में है। टिकट वितरण दौरान पेंच फंसाने वालों को पछतावा हो रहा है या नहीं।
प्रधान संपादक

