बिलासपुर। कोतवाली थाना क्षेत्र में 30 से 40 लाख रुपये के जेवर चोरी के मामले में सत्र न्यायालय ने संदेही गुरविंदर सिंह भाटिया की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और पुलिस की विवेचना अभी प्रारंभिक चरण में है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ देना न्यायोचित नहीं होगा।

कोतवाली क्षेत्र निवासी बलविंदर कौर (60) ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि पति के इलाज के सिलसिले में वह लंबे समय तक घर से बाहर रहीं। इसी दौरान उनके घर की आलमारी में रखे करीब 30 से 40 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवर गायब हो गए। घर लौटने पर जब उन्होंने आलमारी देखी तो जेवर नहीं मिले। शक होने पर उन्होंने अपनी बहन के बेटे गुरविंदर सिंह भाटिया पर चोरी की आशंका जताई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि संदेही गुरविंदर सिंह ने चोरी किए गए जेवरों को विभिन्न गोल्ड लोन कंपनियों और बैंकों में गिरवी रखकर लाखों रुपये का ऋण लिया था। बाद में उसने कुछ जेवर बैंक से छुड़वा भी लिए। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संदेही को बयान दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन वह थाने नहीं पहुंचा और जांच में सहयोग नहीं किया। इसी बीच गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए संदेही ने सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की, वहीं अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी जांच से बच रहा है और मामले में बड़ी रकम व बरामदगी शेष है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि एक असाधारण राहत है। केस डायरी से स्पष्ट है कि संदेही ने बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद पुलिस जांच में सहयोग नहीं किया। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने कथित चोरी के जेवरों को गिरवी रखकर करीब 39 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की है। ऐसे में आरोपी से जेवरों की बरामदगी और अन्य संभावित सह-आरोपियों की भूमिका सामने आना अभी बाकी है, जो गिरफ्तारी के बाद ही संभव हो सकेगा।
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