बिलासपुर। ( एसईसीएल से जय शुक्ला की रिपोर्ट )
छतीसगढ़ ।कांग्रेस शासन काल के दौरान कोल लेव्ही घोटाले की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। कोल स्कैम की जांच अब राज्य सरकार ने सीबीआई के हवाले कर दिया है। आज पूरे दिन सीबीआई की टीम द्वारा एसईसीएल में दबिश देने और आला अफसरों से पूछताछ को लेकर चर्चा होते रही। चर्चा और अफवाह का बाजार बिलासपुर एसईसीएल हेडक्वार्टर के साथ ही समूचे छत्तीसगढ़ में अटकलें लगाई जाती रही। अटकलबाजी और चर्चा के बीच एसईसीएल ने आधिकारिक जानकारी देकर सीबीआई की दबिश और आला अफसरों से पूछताछ ना करने की बात कहते हुए इस तरह की खबरों का जोरदार तरीके से खंडन किया है।

एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश चंद्र ने CBN 36 के एसईसीएल कोरेस्पोंडेंट से चर्चा करते हुए बताया कि एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में आज किसी भी प्रकार की, कोई भी , CBI जाँच या कार्रवाई नहीं हुई है। जैसा की खबरें चलाई जा रही है, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ हैं । CBI की टीम किसी भी प्रकार की कार्रवाई हेतु SECL मुख्यालय बिलासपुर में नहीं आई है। एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश चंद्र के आधिकारिक बयान से साफ हो गया है कि एसईसीएल मुख्यालय में सीबीआई की टीम नहीं पहुंची है और ना ही किसी तरह की पड़ताल की गई है।
दोपहर बाद उड़ी अफवाह

कांग्रेस शासनकाल के दौरान सिंडीकेट बनाकर कोल घोटाला किया गया है। इसमें कोयले के परिवहन में अवैध ढंग से लेव्ही की वसूली की गई है। करोड़ों के कोल स्कैम में आईएएस से लेकर राज्य सेवा संवर्ग के अफसर जेल में बंद है। राज्य सरकार ने जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है। जाहिर है कोल स्कैम को लेकर सीबीआई की दबिश या पूछताछ वाली खबरों को लेकर पाठकवर्ग कुछ ज्यादा ही संवेदनशील हो जाते हैं। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। दोपहर बाद इस आशय की खबरें चलने लगी कि एसईसीएल मुख्यालय में सीबीआई की टीम पहुंची है और आला अधिकारियों से पूछताछ चल रही है। जाहिर सी बात है इसे लेकर लोग अपने तरीके से खबरों की सत्यता और सीबीआई की दबिश को लेकर कंफर्म भी करते रहे। यही कारण है कि पूरे दिन इस बात की चर्चा होते रही। चर्चा पर विराम लगाते हुए एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश चंद्र ने आधिकारिक जानकारी देकर इस पर विराम लगा दिया है।
एसईसीएल प्रबंधन ने कहा है की मीडिया चौथा स्तंभ है लेकिन खबरों की पुष्टि करे फिर लिखे खबरों में जल्दबाजी से किसी संस्था की छवि ख़राब होती है ।एसईसीएल प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि वे भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सही मानें।

Author: Ravi Shukla
Editor in chief