किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योग, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक दिख रहा बड़े फैसलों का असर
धनंजय राठौर ,संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
CBN36 रायपुर, 8 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को नई दिशा और गति दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर समाज के हर वर्ग के जीवन में दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से अधिक का कार्यकाल केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीन पर उतारने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की व्यवस्था में दूरगामी बदलाव की नींव रखी है। सरकार ने एक ओर गरीबों, किसानों और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास के लिए दीर्घकालिक प्रभाव वाले नीतिगत सुधार किए हैं।
प्रधानमंत्री आवास से बदली लाखों परिवारों की तस्वीर

सरकार बनने के तुरंत बाद लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों में प्रधानमंत्री आवास योजना प्रमुख रही। पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन करीब 1,600 आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। पुराने और नए स्वीकृत आवासों को मिलाकर ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
धान खरीदी बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला
सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत के रूप में विकसित किया है। किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई।
धान खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को लागू किए जाने से खरीदी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुविधाजनक और सुगम हुई है।
महिला सशक्तिकरण को मिली नई ताकत
महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों के माध्यम से लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं के खातों में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे अंतरित की जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।
बस्तर में सुरक्षा के साथ विकास की नई इबारत
बस्तर में बदलाव सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। दशकों से नक्सलवाद बस्तर के विकास की राह में सबसे बड़ी चुनौती रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है।
सरकार ने बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई है। इससे बस्तर के लोगों का सरकार के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के माध्यम से विकास योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों और अंतिम छोर तक पहुंचाया जा रहा है।
ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर के लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना’ तैयार की गई है।
बस्तर के जंगलों में स्थापित सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के ग्रामीणों के लिए सुरक्षा के साथ-साथ सेवा और विकास के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य की दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। अब सरकार का लक्ष्य बस्तर को संघर्ष की पहचान से आगे ले जाकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान दिलाना है।
उद्योगों के लिए आसान हुआ कारोबार का रास्ता
उद्योगों के क्षेत्र में राज्य में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ उद्योगों की स्थापना की प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में 450 से अधिक सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, 2026 लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है।
‘जन विश्वास’ सुधारों के माध्यम से 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाओं ने कारोबार और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाया है।
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के लागू होने के बाद राज्य को 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 1.72 लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में हो रहे ये नीतिगत बदलाव इस बात के संकेत हैं कि राज्य का विकास अब केवल योजनाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली, निवेश का वातावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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