सारंगढ़-बिलाईगढ़ की शिक्षिका को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिला संवाद का अवसर
CBN36 रायपुर। छत्तीसगढ़ की एक ग्रामीण शिक्षिका ने अपनी मेहनत, नवाचार और संवेदनशीलता से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव को वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाली सुनीता यादव एकमात्र शिक्षिका हैं।
किताबों से आगे बढ़कर बच्चों को सिखाया, खेल-खेल में बनाया सीखना आसान
सुनीता यादव ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के सीमित संसाधनों वाले स्कूल में पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने खेल-खेल में शिक्षा, गतिविधि आधारित शिक्षण, साहित्य और रचनात्मक माध्यमों को अपनाकर बच्चों में सीखने की रुचि पैदा की। कक्षा में पीछे रहने वाले बच्चों को आगे लाने के लिए भी उन्होंने लगातार प्रयास किए।
लघु फिल्म, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास… तकनीक बनी पढ़ाई का नया माध्यम
कठिन विषयों को आसान बनाने के लिए सुनीता यादव स्वयं और विद्यार्थियों के अभिनय वाली लघु फिल्में तैयार करती हैं। इन फिल्मों के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाता है। इसके अलावा दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी उनकी शिक्षण पद्धति का हिस्सा है।
शिक्षा के साथ बच्चों को रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता से जोड़ने की दिशा में भी उन्होंने पहल की है।
बच्चों के लिए अपने खर्च से दूध, आदिवासी बच्चों के लिए चलाया समर कैंप
सुनीता यादव की पहल सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं रही। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वे अपने खर्च से विद्यार्थियों को नियमित दूध उपलब्ध कराती हैं। समुदाय को न्योता भोजन के लिए प्रेरित करने का काम भी करती हैं।
वहीं शिक्षा से वंचित बच्चों तक पहुंचने के लिए बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाकर अध्यापन किया।
सीड बॉल से लेकर सैनिकों के लिए राखी तक, बच्चों में जगाई संवेदना
सुनीता यादव ने पढ़ाई के साथ बच्चों को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से जोड़ने पर भी जोर दिया। प्रकृति संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार कराने से लेकर देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी निर्माण जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों में सामाजिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव और उनके प्रभावों पर शोध पत्र तैयार करने वाली वे जिले की पहली महिला शिक्षिका भी हैं।
पहले राज्य शिक्षक सम्मान, फिर साहित्य का अलंकरण… अब राष्ट्रीय पहचान
सुनीता यादव को वर्ष 2024 में राज्य शिक्षक सम्मान मिला था। इसके बाद वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया। अब राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान ने उनके नवाचार आधारित शिक्षण कार्य को देशभर में पहचान दिलाई है।
प्रधानमंत्री मोदी से भी हुई मुलाकात
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चयनित शिक्षकों को अपने आवास पर आमंत्रित किया था। इस दौरान सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री से अपने शिक्षण कार्य, नवाचार और ग्रामीण बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों को साझा किया।
प्रधानमंत्री ने उनके लघु फिल्मों, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास जैसे प्रयोगों की सराहना की।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में खुशी की लहर
सुनीता यादव की इस उपलब्धि पर जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिले की शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
एक छोटे से ग्रामीण स्कूल की कक्षा में शुरू हुई नवाचार की यह यात्रा अब राष्ट्रपति भवन से लेकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुकी है। सुनीता यादव की उपलब्धि यह संदेश देती है कि सीमित संसाधन शिक्षा की राह में बाधा नहीं, यदि शिक्षक के भीतर सीखने और सिखाने का जुनून हो।
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