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August 22, 2026 7:00 pm

दो साल में 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण, 7 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने गिनाईं विभाग की उपलब्धियां, 5 हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी

CBN36 रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले दो वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अटल नगर, नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने विभागीय योजनाओं और उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया।

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया है। वहीं, युक्तियुक्तकरण के जरिए 15,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का समायोजन किया गया। 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई, जबकि 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

2,813 प्राचार्यों की पदोन्नति

शिक्षकों की पदोन्नति के क्षेत्र में भी विभाग ने बड़ी संख्या में पदोन्नतियां की हैं। टी संवर्ग में 1,335 और ई संवर्ग में 1,478 समेत कुल 2,813 प्राचार्यों को पदोन्नत किया गया। इसके अलावा टी संवर्ग में 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति हुई है। पिछले दो वर्षों में विभिन्न पदों पर 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं।

2,104 पदों पर सीधी भर्ती, 5 हजार पदों की परीक्षा प्रक्रिया में

मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई है। वहीं 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती की परीक्षा प्रक्रिया जारी है। दिव्यांग बच्चों के लिए 848 स्पेशल एजुकेटर पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी भर्ती की गई।स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है।

अब ऑनलाइन सीबीटी से होगी भर्ती

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी शुरू की गई है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के 1,895 और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के 1,171 समेत कुल 3,066 संविदा पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

स्थानीय भाषाओं में तैयार हो रही पाठ्यपुस्तकें

प्रदेश में 15 जुलाई 2024 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई है। कक्षा पहली और दूसरी की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया है। पहली और दूसरी कक्षा के लिए 16 स्थानीय और चार अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार की गई हैं। कक्षा पहली, दूसरी, तीसरी और छठवीं की एनसीईआरटी पुस्तकों का राज्य के अनुरूप अनुकूलन किया गया है।

भाषा मैपिंग करने वाला देश का पहला राज्य

मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने भाषा-चित्रण यानी लैंग्वेज मैपिंग का काम किया है। बस्तर संभाग में बच्चों की स्थानीय भाषा को कक्षा में उपयोग करने के लिए 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षक प्रशिक्षित किए गए हैं। कक्षा पहली से तीसरी तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी भाषाओं में पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।

85 फीसदी शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति

शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक और टीके एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। विभाग के अनुसार प्रतिदिन करीब 85 प्रतिशत शिक्षक टीके एप पर अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस कार्यप्रणाली और ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

45 लाख से अधिक विद्यार्थियों को समय पर किताबें

कक्षा पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों को सत्र शुरू होने से पहले पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की पहल से 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। किताबों के वितरण और सत्यापन के लिए स्कैनिंग व्यवस्था लागू की गई है। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 16 बोलियों में पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की पहल की गई है।

सरस्वती साइकिल योजना के तहत 1 लाख 62 हजार 827 बालिकाओं को साइकिल दी गई। वहीं कक्षा पहली से आठवीं तक के 28 लाख 63 हजार 786 विद्यार्थियों को निशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया।

10वीं-12वीं के परिणाम में करीब दो फीसदी सुधार

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में करीब दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परीक्षा से पहले समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण, बेहतर अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठक और केंद्रीकृत परीक्षाओं के जरिए परिणाम सुधारने पर जोर दिया गया।

शनिवार को बैग के बिना पढ़ाई के साथ गतिविधियां

विद्यालयों में हर शनिवार बैग-रहित दिवस के तहत विद्यार्थियों के लिए खेल, योग, व्यायाम, स्थानीय कला-संस्कृति और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। महापुरुषों की जयंती, तीज-त्योहार और ऐतिहासिक तिथियों से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया जा रहा है।

तीन साल में 504 नए स्कूल स्वीकृत

विद्यालयों की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पिछले तीन वर्षों में 504 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नए भवन का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच 2,583 अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई।

विद्यालयों के शौचालय निर्माण और मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 302 शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है।

150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए 100 करोड़

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण और संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार की योजना प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की है।

बस्तर में 48 बंद स्कूल फिर खुले

बस्तर और आदिवासी अंचलों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर भी विभाग का जोर है। नियत नेल्ला नार के तहत बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक शालाएं स्थापित की गई हैं। द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।

शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के जरिए शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं 48 बंद विद्यालय दोबारा खोले गए हैं और 36 नए विद्यालय शुरू किए गए हैं।

एआई से होगी स्कूलों की ऑनलाइन निगरानी

शिक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित किया गया है। इसके जरिए स्कूलों की अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं, पीएम पोषण सहित विभिन्न योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों और अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है।पाठ्यपुस्तकों की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से शासन को करीब 40 करोड़ रुपये की बचत होने का दावा विभाग ने किया है।

पीवीटीजी बच्चों के लिए 40 छात्रावास स्वीकृत

प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के लिए स्कूलों के नजदीक आवासीय सुविधा विकसित की जा रही है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में 33 हजार से अधिक बच्चे रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 21 का निर्माण शुरू हो चुका है।

शिक्षा व्यवस्था को तकनीक और संसाधनों से मजबूत करने का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए शिक्षकों की उपलब्धता, पारदर्शी भर्ती और पदोन्नति, आधुनिक स्कूल भवन, बहुभाषी शिक्षा, डिजिटल तकनीक और दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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