बिलासपुर। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन सोमवार देर रात रेलवे परिक्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धा और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस दौरान माता लक्ष्मी के दूतों ने प्रतीकात्मक रूप से भगवान जगन्नाथ के रथ का एक हिस्सा तोड़कर उनके रुष्ट होने का संदेश दिया। इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनने के लिए देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं। स्वस्थ होने पर वे अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी मां के घर, गुंडिचा मंदिर, दर्शन के लिए जाते हैं। इस दौरान वे माता लक्ष्मी को बिना बताए ही प्रस्थान कर जाते हैं।

भगवान के बिना सूचना दिए चले जाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। मान्यता है कि वे अपने दूतों को गुंडिचा मंदिर भेजकर भगवान जगन्नाथ के रथ का एक हिस्सा प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त करवाती हैं। यह परंपरा माता लक्ष्मी की नाराजगी और भगवान के शीघ्र लौटने के संदेश का प्रतीक मानी जाती है।
रेलवे परिक्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में इस धार्मिक परंपरा का विधिवत निर्वहन किया गया। अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ आयोजन में भाग लिया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा तथा माता लक्ष्मी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
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