रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय लोगों के सहयोग को दिया।
मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अपनाई गई सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति से निर्णायक सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सुरक्षा अभियान और विकास कार्यों को साथ-साथ आगे बढ़ाया गया।
साय ने कहा कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति लागू की है। इसके तहत आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार की सुविधा देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, बल्कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी तेजी से विस्तार किया गया। अब सरकार का पूरा फोकस ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के जरिए बस्तर के समग्र विकास पर है।
उन्होंने बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के तहत 31 योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं का संतृप्तिकरण किया जा रहा है, जिससे 5,542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित कर उन्हें जनसेवा और आजीविका केंद्र बनाया जा रहा है।
साय ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। वहीं, ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर दायरे के 525 गांवों में 17 विभागों की 43 योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग में 6.79 लाख राशन कार्ड, 17 लाख जनधन खाते, 24.66 लाख आधार कार्ड, 22 लाख आयुष्मान कार्ड, 1.18 लाख वनाधिकार पत्र और 3.89 लाख किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 1.76 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जबकि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार अतिरिक्त आवास मंजूर किए गए हैं। 240 नक्सल प्रभावित गांवों में बंद पड़े 458 विद्यालयों में से 421 दोबारा शुरू किए गए हैं और 36 नए स्कूल स्वीकृत हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर काम जारी है। जगदलपुर में हवाई सेवाओं का विस्तार किया गया है, जबकि रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में है, जिससे बस्तर में पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में चार लाख से अधिक लोगों की भागीदारी रही, जिससे युवाओं को सकारात्मक दिशा और स्थानीय संस्कृति को नई पहचान मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की एकीकृत रणनीति से बस्तर अब विश्वास, अवसर और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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