बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर, चार्जशीट एवं समन आदेश को चुनौती देने वाली श्री रविशंकर महाराज की याचिका पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने मामले को 15 जून 2026 को नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु एवं न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की अवकाशकालीन खंडपीठ ने पारित किया।
सीबीआई ने सह-आरोपी की लंबित याचिका और जमानत का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि इसी एफआईआर से संबंधित एक सह-आरोपी की याचिका (CRMP No. 1184/2026) पर उच्च न्यायालय की नियमित पीठ पहले से सुनवाई कर रही है।
सीबीआई की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता एफआईआर और चार्जशीट को चुनौती दे रहे हैं, किंतु उन्हें 6 अप्रैल 2026 को निचली अदालत से जमानत प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में मामले में ऐसी कोई विशेष तात्कालिकता नहीं है, जिसके कारण ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सुनवाई आवश्यक हो।
आरोप तय होने की प्रक्रिया का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता श्री रविशंकर महाराज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनु शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि 18 जून 2026 को निचली अदालत में आरोप तय किए जाने के प्रश्न पर सुनवाई निर्धारित है। उनका कहना था कि यदि उच्च न्यायालय से कोई अंतरिम राहत नहीं मिलती है तो निचली अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है, इसलिए मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है।
न्यायालय ने कहा—अवकाशकालीन सुनवाई की आवश्यकता नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने माना कि याचिकाकर्ता पहले से जमानत पर हैं, इसलिए अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। हालांकि, 18 जून को निचली अदालत में प्रस्तावित कार्यवाही को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने याचिका को 15 जून 2026 को नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही तत्काल सुनवाई के लिए प्रस्तुत अंतरिम आवेदन (I.A. No. 2) का निराकरण कर दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पंकज पांडेय, गिरीश त्रिपाठी, राहुल अंबस्त तथा अभ्युदय शर्मा ने भी पैरवी की।
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