“वीसी के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता ने उठाया स्वास्थ्य का मुद्दा, राज्य सरकार को तत्काल चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने का आदेश”
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बंदी अमित मित्तल के स्वास्थ्य संबंधी मामले में राज्य सरकार को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमित मित्तल की ओर से पक्ष रखते हुए उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का मुद्दा उठाया। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
मामला अमित मित्तल द्वारा दायर जमानत याचिका (एमसीआरसी क्रमांक 4981/2026) से जुड़ा है, जिस पर जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ में सुनवाई हुई। याचिका में जमानत के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को भी आधार बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए। उनके साथ अधिवक्ता अतुल कुमार उपस्थित रहे। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी की टीम ने भी पैरवी की, जिसमें अधिवक्ता हिमांशु पांडेय और अरुण गौर शामिल थे।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि अमित मित्तल गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और उन्हें नियमित चिकित्सकीय निगरानी, विशेषज्ञ परामर्श तथा बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि बंदी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसे कानून के अनुरूप सभी आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व है। उन्होंने अदालत से तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने का आग्रह किया। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विनय पांडे उपस्थित हुए और उन्होंने सरकार का पक्ष रखा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि अमित मित्तल को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए तथा बीमारी की गंभीरता को देखते हुए उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
12 जून तक मांगा विस्तृत शपथ पत्र
हाईकोर्ट ने मामले में जांच एजेंसी के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को 12 जून 2026 अथवा उससे पहले विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। शपथ पत्र में यह बताना होगा कि बंदी को वर्तमान में कौन-कौन सी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, उसका उपचार किस प्रकार चल रहा है तथा स्वास्थ्य संबंधी क्या स्थिति है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में निर्धारित की है। अगली सुनवाई के दौरान प्रस्तुत शपथ पत्र और चिकित्सा रिपोर्ट का परीक्षण कर अदालत आगे की कार्यवाही करेगी।
मुकुल रोहतगी की मौजूदगी से बढ़ी मामले की चर्चा
मामले की सुनवाई के दौरान देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित होना चर्चा का विषय रहा। कानूनी हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण सुनवाई माना जा रहा है, क्योंकि जमानत याचिका के साथ बंदी के स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों का प्रश्न भी अदालत के समक्ष प्रमुखता से उठाया गया है।
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