गुरु, गुड, शक्कर और सीट, ये सब क्या है
छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों सत्ताधारी दल के एक दिग्गज नेता व मंत्री की बातें ज्यादा हो रही है। सत्ता के गलियारे में हो या फिर संगठन के किसी कोने में, या ब्यूरोक्रेट्स के बीच। इन दिनों इनकी खूब चर्चा हो रही है। अब आप ये सोच रहे होंगे, चर्चा किसलिए हो रही है, कामधाम ठीक है क्या। या फिर सरकार में अच्छी खासी पकड़। अगर ऐसा सोच रहे हैं तो फिर आपने सही लाइन नहीं पकड़ पाई। गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की सभा याद आ रही है आपको, जिसमें सीएम आए थे, मंत्री महाशय भी थे। हाल के दिनों में प्रश्नकाल के दौरान भी कुछ ऐसा ही वाकया हुआ। सेंट्रल यूनिवर्सिटी की सभा में कद्दावर नेता की सीट पर उटपटांग बातें कर विवादित बन गए थे, प्रश्नकाल के दौरान गुरु गुड़ चेला शक्कर वाली बातें उड़ाकर फिर अपनी भद्द पिटवा ली। आलम ये कि अब ना तो सत्ता और ना ही विपक्षी और तो और ब्यूरोक्रेट्स भी इनकी बातों को गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। एक नई उपाधि मसखरा की दे दी है।
बगैर होमवर्क सदन पहुंच रहे मंत्री, सरकार की पिट रही भद्द
राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली ने नया प्रयोग किया। प्रेशर सरकार बनाने की सोची और इसे अमलीजामा भी पहना दिया। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। प्रश्नकाल से लेकर चलने वाली सत्र के दौरान कई ऐसे मौके आ रहे हैं जब मंत्री सदस्यों के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। निरुत्तर हो जा रहे हैं। कारण भी साफ है, होमवर्क करके नहीं आ रहे हैं। बिना होमवर्क आप कैसे सवालों का सामना करेंगे और जवाब कैसे देंगे। अधिकांश मंत्रियों के साथ ऐसा ही हो रहा है। बगैर तैयारी के सीधे सदन पहुंच जा रहे हैं। सदन में जो कुछ चल रहा है और कुछ देखने में आ रहा है,इससे तो यही लग रहा है, बिना तैयारी बंगले से सीधे सदन पहुंचने वाले मंत्रियों के कारण सरकार की भद्द पिट रही है।
आईएएस की ऊंची छलांग, छग से सीधे पीएमओ
छत्तीसगढ़ के एक आईएएस अफसर की ऊंची छलांग की चर्चा जमकर होने लगी है। कल की ही तो बात है, कार्मिक मंत्रालय से सीधे छत्तीसगढ़ सरकार के पास चिट्ठी आई,चिट्टी में 2016 बैच के आईएएस को पीएमओ में उप सचिव के पद पर डेपुटेशन में बुलावा आ गया। जैसे ही यह खबर ब्यूरोक्रेट्स लेकर सत्ता के गलियारे में पहुंची,आईएएस के ऊंची छलांग को लेकर जमकर चर्चा होने लगी है। मुख्यमंत्री के गृह जिले में कलेक्टरी के बाद जनसंपर्क आयुक्त का कामकाज संभालने वाले आईएएएस रवि मित्तल के कामकाज पर सीधे दिल्ली की नजर पड़ी और छत्तीसगढ़ की राजधानी से उनको सीधे दिल्ली के लिए बुलावा आ गया। कहावत है ना, काम ही काम आता है और दूसरा कुछ भी नहीं। आईएएस के बारे में भी कुछ-कुछ ऐसा ही कहा जाता है।
सीजी बोर्ड की मान्यता और सीबीएसई के नाम पर खेल
छत्तीसगढ़ में इन दिनों बड़ा खेल हो रहा है। बड़े प्राइवेट स्कूल इस खेल में भीतर तक शामिल है। सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई की पढ़ाई का झांसा देकर पालकों और बच्चों के साथ धोखा तो कर ही रहे हैं, उनके करियर के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के और शहरों के साथ ही साथ बिलासपुर में भी इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है। दरअसल यह खेल लंबे समय से चले आ रहा है। इस बार राज्य सरकार ने पांचवीं और आठवीं बोर्ड की केंद्रीयकृत परीक्षा को लेकर जब कड़ाई बरती तब प्राइवेट स्कूलों का लंबे समय से चले आ रहे गोरखधंधा की पोल खुल गई। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पालकों का गुस्सा होना स्वाभाविक था, लिहाजा यह गुस्सा दिखाई भी दिया। न्यायधानी में तो और भी गजब हो रहा है। शिक्षा विभाग के अफसरों ने तो गजब ही कर दिया। फर्जीवाड़ा करने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्ती बरतने के बजाय उसे सेफ साइड में रखने की कोशिश हो रही है। गजब ये कि सीबीएसई स्कूल के बच्चे अब पूरक परीक्षा के दौरान वार्षिक परीक्षा दिलाएंगे। इसे क्या कहेंगे।
अटकलबाजी
सभा समारोह और गंभीर चर्चा के दौरान किसी के बारे में कुछ भी कमेंट्स करने वाले सत्ताधारी दल के एक मंत्री को इन दिनों मसखरा की उपाधि से क्यों नवाजा जा रहा है। कौन हैं ये मसखरा मंत्री जो अपनों को भी नहीं छोड़ रहे हैं।
जनसंपर्क आयुक्त सेंट्रल डेपुटेशन पर दिल्ली जा रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव की कुर्सी संभालेंगे। डेपुटेशन का आदेश आने के बाद आयुक्त के पद को लेकर चर्चा छिड़ गई है। जरा पता करिए कौन-कौन दौड़ में शामिल हो गए हैं।
प्रधान संपादक


