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March 19, 2026 6:20 pm

हाई कोर्ट डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र में मांगा जवाब

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने जादू टोना के संदेह पर पिता एवं पुत्रों की सामूहिक पिटाई कर अर्धनग्न कर गांव में घूमाने व रात भर बंधक बनाकर रखे जाने के मामले में पुलिस द्बारा न्यायिक आदेश का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने मामले में डीजीपी को शपथपत्र में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभ की गई विभागीय जांच के परिणाम अभिलेख पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।
अभनपुर थाना क्षेत्र में 13 मार्च 2025 को ग्रामीण काला जादू की बात कहते हुए तिलक साहू की पिटाई कर रहे थे। तिलक साहू ने इस बात की जानकारी अपने पिता अमर सिंह साहू को दी, इस पर पिता अमर सिंह अपने बेटे नरेश साहू के साथ मौके में गया। इसके बाद ग्रामीणों ने तीनों की पिटाई कर बंधक बनाया व अर्धनग्न कर पूरे गांव में घूमाया व मुंह में खालिख लगाकर जूते की माला पहना कर रात भर चौराहे में बंधक बनाकर रखा गया। दूसरे दिन सुबह डायल 112 को सूचना दी गई। इस पर पुलिस वाले मौके में पहुंचे और पीड़ित पक्ष से एक कागज में हस्ताक्षर लिया गया कि वे कोई शिकायत नहीं करेंगे। इसके बाद पुलिस ने तीनों को गांव के बाहर छोड़ दिया। पुलिस अधिकारियों के समक्ष हुई इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष की रिपोर्ट नहीं लिखे जाने पर उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दिया।
न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपियों के खिलाफ टोनही प्रताड़ना अधिनियम एवं अन्य धारा के तहत जुर्म दर्ज कर मामले में चालान पेश करने का आदेश दिया। न्यायिक आदेश का पालन नहीं करने पर पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ जमानती धारा में अपराध पंजीबद्ध किया। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित ने हाई कोर्ट में याचिका पेश की। हाईकोर्ट ने मॉब लॉचिंग की घटना को नियंत्रित नहीं कर निष्पक्ष जांच नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने इस मामले में एसपी रायपुर, आईजी रायपुर एवं डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। डीजीपी ने शपथ पत्र में कहा कि मामले में विभागीय जांच चल रही है। दोषी इंस्पेक्टर सिद्धेश्वर प्रताप सिंह, सब-इंस्पेक्टर नरसिंह साहू, पुलिस स्टेशन अभनपुर के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। चार्जशीट भी दोनों अधिकारियों को दिया गया है।
इस जवाब के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी समस्त शिकायतें विचारण न्यायालय के समक्ष उठाएं, और अपने इस तर्क के समर्थन में उचित सामग्री प्रस्तुत करें कि अभियुक्त व्यक्तियों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 309(6) और धारा 111(3), तथा छत्तीसगढ़ टोनाही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत अपराध कायम रहे। साथ ही विचारण न्यायालय विधि के अनुसार उचित आदेश पारित करेगा। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि सार्वजनिक अपमान, भीड़ द्बारा हिंसा और पुलिस अधिकारियों की ओर से कथित चूकों से संबंधित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के आचरण के संबंध में लंबित रखना उचित है। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़, उपर्युक्त दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभ की गई विभागीय जांच के परिणाम को, एक नया शपथ-पत्र दाखिल करके, अभिलेख पर प्रस्तुत करेंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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