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March 17, 2026 9:20 pm

याचिकाकर्ता के खिलाफ 32 क्रिमिनल केस दर्ज, इसलिए नही मिलेगा सम्मान निधि

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने मीसा बंदियों को दी जाने वाली लोक नायक जय प्रकाश नारायण सम्मान निधि को लेकर कहा है कि यदि किसी व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है, तो वह इस सम्मान निधि का हकदार नहीं होगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस आधार पर अपील खारिज कर दी है।

रायपुर निवासी रामगुलाम सिंह ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, इसमें मांग की थी कि उन्हें अन्य मीसा बंदियों की तरह सम्मान निधि नहीं दी जा रही है। बताया कि वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान वे छात्र नेता थे और उन्हें मीसा एक्ट के तहत गिरफ्तार कर 31 अगस्त 1975 से 10 जनवरी 1977 तक रायपुर जेल में रखा गया था। इस संबंध में उनके आवेदन को कलेक्टर ने वर्ष 2010 में यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी, इसके खिलाफ अपील की गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 1974 से 1986 के बीच अलग-अलग थानों में करीब 32 मामले दर्ज थे। सम्मान निधि नियम, 2008 के नियम 6 के तहत यह सम्मान केवल उन्हें ही दिया जा सकता है जो विशुद्ध रूप से राजनीतिक या सामाजिक कारणों से जेल गए हों और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। वर्तमान में भी याचिकाकर्ता का नाम पुलिस की निगरानी सूची में शामिल है।
हाई कोर्ट ने अपील पर दिए गए फैसले में कहा कि सम्मान निधि देना सरकार का वैधानिक विवेकाधिकार है। जिस कमेटी ने याचिकाकर्ता के दावे को खारिज किया, उसके फैसले में कोई कमी नहीं है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने कमेटी के मूल फैसले को चुनौती न देकर केवल कलेक्टर के पत्र को चुनौती दी थी, जो तकनीकी रूप से सही नहीं है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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