“एसडीओपी की कार्यशैली पर उठे सवाल, क्षेत्र में बढ़ती नाराजगी पर उच्चाधिकारियों को लेना होगा संज्ञान”
बिलासपुर ।कोटा थाना अंतर्गत फिरंगीपारा क्षेत्र में हंगामे की सूचना पर पुलिस ने तत्काल पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस रजनेश सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि तथ्यों के आधार पर कठोर एवं उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार 04 मार्च 2026 को अपराह्न लगभग 3 से 4 बजे के बीच वार्ड क्रमांक 21 फिरंगीपारा के पार्षद भागवत साहू ने मोबाइल के माध्यम से सूचना दी कि फिरंगीपारा नाका चौक स्थित पानी टंकी के पास तथा देवरिया पारा क्षेत्र में कुछ युवक अशोभनीय हरकत करते हुए आपस में गाली-गलौज और मारपीट कर रहे हैं। बताया गया कि उक्त युवक कपड़े उतारकर हंगामा कर रहे थे, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल निर्मित हो गया और आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सूचना मिलते ही पेट्रोलिंग पार्टी क्रमांक 04 एवं थाना स्टाफ मौके पर पहुंचा। पुलिस दल ने वार्ड पार्षद से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली तथा मौके पर मौजूद असामाजिक तत्वों को खदेड़कर क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल की। पुलिस की तत्परता से संभावित बड़ी घटना टल गई।
एसएसपी रजनेश सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ भ्रामक एवं अपुष्ट समाचारों के माध्यम से प्रकरण को गलत दिशा देने का प्रयास किया गया है। प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि हंगामा करने वाले तत्व स्वयं को बचाने और पुलिस कार्रवाई को विवादास्पद बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो अनुचित है।
पुलिस के आला अधिकारियों का यह कहना एकदम सही है कि पुलिस बल दिन-रात कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन बिना आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित समाचार न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिराते हैं, बल्कि असामाजिक तत्वों को भी प्रोत्साहित करते हैं।लेकिन यहाँ इस बात पर भी ध्यान देना ज़रूरी है कि आख़िर ऐसा क्यो हो रहा है ?
एसएसपी का मीडिया से अपील भी जायज है कि किसी भी समाचार के प्रकाशन से पूर्व संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक पुष्टि अवश्य कर ली जाए, ताकि सत्य एवं संतुलित जानकारी आमजन तक पहुंचे और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई प्रभावी रूप से की जा सके।
एसडीओपी की कार्यशैली पर उठे सवाल, क्षेत्र में बढ़ती नाराजगी पर उच्चाधिकारियों को लेना होगा संज्ञान
कोटा अनुभाग में पदस्थ एसडीओपी की कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कई मामलों में जिस प्रकार की शिकायतें सामने आ रही है उसे कतई सही नहीं माना जा सकता,कहीं ना कहीं संवाद की कमी या समयबद्ध प्रतिक्रिया न मिलने से जनविश्वास प्रभावित हो रहा है।इसके अतिरिक्त और भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिसको लेकर कोटा थाना क्षेत्र में चर्चाओ का सिलसिला जारी है ।
सूत्रों के अनुसार, हाल के घटनाक्रमों के बाद कोटा पुलिस एसडीओपी की कार्यशैली को लेकर भी प्रश्न उठने लगे हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जहां पुलिस की प्राथमिकता है, वहीं पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जनसंवाद भी उतने ही आवश्यक माने जाते हैं।यदि समय रहते इस प्रकार की नाराजगी पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका प्रभाव पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जनसहयोग पर पड़ सकता है। यह स्थिति विभाग के उच्चाधिकारियों के लिए भी सकारात्मक संकेत नहीं मानी जा रही है।
आवश्यक है कि वरिष्ठ अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करें और यदि कहीं संवाद या समन्वय में कमी है तो उसे दूर करने के ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि पुलिस और आमजन के बीच विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत हो सके।
प्रधान संपादक


